मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। एमडीडीएम कालेज के स्नातक की एक छात्रा दो वर्ष से पेंडिंग परिणाम में सुधार कराने के लिए बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग का चक्कर काट रही हैं। इसका असर अब छात्रा के निजी जीवन पर पड़ने लगा है। बायोडाटा पर स्नातक की उत्तीर्णता का जिक्र नहीं होने से उसकी शादी में बाधा आ रही है। छात्रा कालेज से विश्विद्यालय तक दौड़ भाग कर रही है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। वह स्नातक सत्र 2017-20 में एमडीडीएम कालेज में अध्ययनरत थीं। 2019 में उसने द्वितीय वर्ष की परीक्षा दी थी। इसमें संगीत के पेपर में उसे प्रायोगिक परीक्षा में अनुपस्थित बता दिया गया था।

छात्रा ने अपनी उपस्थिति का प्रमाण भी लगाया, लेकिन इसके बाद भी परिणाम सुधार नहीं किया गया। उसने बताया कि अबतक दस बार से अधिक कागजात कालेज से विश्वविद्यालय तक जाकर जमा कर चुकी है। इसके बाद भी परिणाम नहीं सुधर रहा है। वह गायघाट प्रखंड की मूल निवासी है। कोरोना काल में पिता को खोने के बाद स्वजन शादी करना चाहते हैं, लेकिन पेंडिंग परिणाम को देख कई जगह बात बनते-बनते रह गई। वहीं, परीक्षा नियंत्रक डा.संजय कुमार का कहना है कि समय पूरा होने के बाद इसने कोर्स पूरा किया है। ऐसे में परिणाम जारी करना मुश्किल है।

प्रमोटेड में सुधार के लिए लग रही भीड़

वहीं, दूसरी तरफ बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में मंगलवार को पार्ट टू में पेंडिंग परिणाम में सुधार के लिए विद्यार्थियों की भीड़ लगी थी। छात्र रौनक राज ने बताया कि उसे एक पेपर में प्रमोटेड कर दिया गया है। आरटीआइ से कापी निकालने के लिए आवेदन दिए चार दिन बीत गए पर कापी नहीं दी जा रही।

पेंडिंग परिणाम में सुधार कराने पहुंचे अधिकतर छात्रों को एक हफ्ते या दस दिन बाद आने के लिए कह कर घर भेज दिया गया। सोनी कुमारी ने कहा कि विवि में कोई काम समय पर नहीं होता है। अंकपत्र में सुधार के लिए दो महीने से भागदौड़ कर रही है। सुधांशु, आयुष आनंद और कुमार गौरव ने बताया कि कुछ दिन पहले भी पेंडिंग में सुधार के लिए आवेदन देकर गए थे, अबतक परिणाम नहीं सुधारा गया।

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Edited By: Aditi Choudhary

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