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माघ पूर्णिमा 2026: स्नान, दान और पुण्य का बन रहा महासंयोग, मिलेगा मोक्ष का मार्ग

By Gopal T Tiwari Edited By: Ajit kumar
Published: Wed, 28 Jan 2026 04:45 PM (IST)

Maghi Purnima Date:1 फरवरी 2026 को मनाई जा रही माघ पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन ...और पढ़ें

Magh Purnima 2026: इस वर्ष बन रहे महत्वपूर्ण संयोगों के कारण यह विशेष फलदायी हो गया है। यह तस्वीर एआई की मदद से तैयार की गई है।

Magh Purnima 2026: इस वर्ष बन रहे महत्वपूर्ण संयोगों के कारण यह विशेष फलदायी हो गया है। यह तस्वीर एआई की मदद से तैयार की गई है।

HighLights

  1. 1 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा, स्नान-दान का विशेष महत्व।

  2. रवि-पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा।

  3. गंगा स्नान, विष्णु पूजा से मोक्ष व धन-धान्य की प्राप्ति।

गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। Magh Purnima significance: गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। Magh Purnima significance: हिंदू ग्रंथों में माघ पूर्णिमा का विशेष स्थान है। इस दिन किए जाने वाले स्नान और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। इस वर्ष 1 फरवरी यानी रविवार को माघ पूर्णिमा मनाई जा रही है।

इस बारे में पंडित प्रभात मिश्र ने कहा कि इस दिन स्नान, दान और जप-तप करने से लोगों के जीवन की सभी प्रकार की परेशानी दूर हो जाती है। सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। परिवार के सदस्यों के बीच संबंध मधुर हो जाते हैं। गृह क्लेश दूर हो जाते हैं। यूं तो पूरे दिन स्नान करना लाभकारी है, किंतु पुण्यकाल के स्नान और दान का श्रद्धालुओं को विशेष फल मिलता है।

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जानिए माघ पूर्णिमा के शुभ समय

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 31 जनवरी 2026, शाम 07:45 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त : 1 फरवरी 2026, शाम 06:10 बजे
  • स्नान का श्रेष्ठ समय : ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 05:25 से 06:15 बजे)
  • पुण्यकाल : सूर्योदय से सूर्यास्त तक 

इस वर्ष बन रहा दुर्लभ योग

जहां तक ग्रह स्थिति की बात है तो माघ पूर्णिमा 2026 पर इस बार रवि-पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बनता दिख रहा है। दिन को लेकर भी संयोग है। रविवार और पूर्णिमा के मेल से प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य और भगवान विष्णु का संयोग हो रहा है।

यह विशेष कृपा दिलाने वाला माना गया है। इस बारे में ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह योग जातक को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देता है। रोग से मुक्ति मिलती है। विपरीत समय में धैर्य के साथ आगे बढ़ने में मदद मिलती है।

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धार्मिक दृष्टिकोण से भी खास

शास्त्रों में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि माघ पूर्णिमा के दिन सभी देवी-देवताओं का गंगा में निवास होता है। ऐसे में गंगा स्नान करने या फिर गंगाजल से स्नान करने से सभी पाप व ताप का नाश होता है। दावा तो यहां तक किया गया है कि पूर्व जन्म के खराब कर्मों से भी मुक्ति मिल जाती है।

इस दिन स्नान के बाद दान की भी परंपरा है। इसका विशेष महत्व है। इस तिथि को मोक्ष प्रदायिनी तिथि कहा जाता है। प्रयागराज के संगम में तो इस दिन विशेष रूप से स्नान किया जाता है। साधकों के लिए भी यह दिन खास होता है। उनके जीवन को नई दिशा प्राप्त होती है।

पंडित प्रभात मिश्र कहते हैं कि इस दिन न केवल सूर्य वरन चंद्रमा की किरणों से भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे पूर्णिमा की रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें। इससे आरोग्य की प्राप्ति होगी।

पुराणों के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन गंगाजल में भगवान विष्णु का निवास बताया गया है। इसलिए इस दिन गंगाजल को छू लेने को ही स्वर्ग के समान सुख प्राप्त करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। विद्वानों का कहना है कि भगवान विष्णु माघ पूर्णिमा के दिन व्रत, उपवास, दान और ध्यान से उतने प्रसन्न नहीं होते जितना इस दिन स्नान करने से।

माघ पूर्णिमा की पूजा विधि

इस दिन श्रद्धालुओं को निन्म प्रकार से पूजा करना चाहिए। यह विशेष फलदायी होता है-

  • स्नान : सूर्योदय से पूर्व गंगा में या फिर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लेना चाहिए।
  • अर्घ्य: स्नान के उपरांत भगवान भास्कर को जल अर्पण करना चाहिए
  • संकल्प: व्रत और सात्विक जीवन का संकल्प करना चाहिए
  • पूजन: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए
  • जप : “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करना चाहिए
  • आरती : इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा और आरती का विशेष फल मिलता है। 

इस दिन क्या करें दान?

पंडित प्रभात मिश्र कहते हैं कि माघ पूर्णिमा में पुण्यकाल के दौरान किया गया दान अश्वमेध यज्ञ के समान फल देने वाला होता है। इस दिन दान से पितृ दोष भी शांत हो जाता है। आइये जानते हैं कि इस मौके पर दान की जाने वाली प्रमुख वस्तुएं कौन-कौन सी हैं-

  • तिल और गुड़
  • ऊनी वस्त्र और कंबल
  • अन्न, घी और खिचड़ी
  • सोना-चांदी (क्षमता के अनुसार)
  • गाय या बछिया (महादान) 

मिलता है विशेष फल

कहा जाता है कि यदि माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के समय दूध व चीनी को मिला कर जल अर्पित किया जाए तो मन को शांति मिलती है। आर्थिक मजबूती रहती है। घर में आरोग्य की स्थिति रहती है। क्रोध को काबू कर पाना संभव हो पाता है।

यह न केवल धार्मिक वरन आध्यात्मिक तौर पर भी विशेष महत्व का है। इस दिन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया कोई भी कर्म विशेष फल देता है।

माघ पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और ध्यान विशेष फलदायी होता है। इस दिन मोती या चांदी धारण करना और खीर खाना विशेष शुभ माना जाता है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि माघ की पूर्णिमा के दिन नौ ग्रहों की कृपा आसानी से पाई जा सकती है।

माघ पूर्णिमा के दिन मध्य रात्रि में किया गया ध्यान और उपासना विशेष फलदायी होती है। इससे व्यक्ति को बहुत जल्दी ईश्वरीय कृपा का अनुभव होने लगता है। दैहिक, दैविक व भौतिक तापों का नाश इस दिन स्नान करने के परिणामस्वरूप होता है।