मुजफ्फरपुर, जासं। तीन दशक से जलजमाव की पीड़ा झेल रहे शहर को राहत देने के लिए सरकार ने तीन साल पहले 183 करोड़ की जलनिकासी योजना को मंजूरी दी थी। सरकार ने योजना का मूर्तरूप देने की जिम्मेवारी बिहार राज्य शहरी विकास निगम (बुडको) को दी थी। बूडको ने निविदा निकाल कार्य के लिए मेसर्स खिलाड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. एवं अन्नू इन्फ्रा कन्स्ट्रक्ट इंडिया प्रा.लि. का चयन किया। पहली मार्च 2019 को तत्कालीन नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने योजना का शिलान्यास किया था। योजना के तहत तीन आउटलेट एवं एसटीपी का निर्माण होना है, लेकिन तीन साल बाद भी एक ही आउटलेट के निर्माण का कार्य चल रहा। शेष दो आउटलेट का काम कब शुरू होगा यह बताने वाला कोई नहीं। शहर बारिश के पानी में डूब, शहरवासी पीड़ा झेले इससे न बूडको को फर्क पड़ता है और न ही एजेंसी को। यही हाल रहा तो आने वाले बरसात में शहर फिर डूबेगा।

योजना के तहत 22.5 किमी नाला का होना है निर्माण

183 करोड़ की जलनिकासी योजना के तहत 22.5 किमी, जिसमें 5.68 किमी कवर्ड एवं 16.72 किमी खुले बड़े नाले का निर्माण होना है। साथ ही 21 कल्वर्ट का भी निर्माण होना है। तीन स्पेशल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण मनिकामन, फरदो नाला के निकट एवं तिरहुत नगर के निकट करना था। इतना ही नहीं एक दशक तक उनके रखरखाव एवं संचालन की जिम्मेवारी काम करने वाली एजेंसी को करनी है।

तीन आउटलेट से निकलना है शहर का पानी

बारिश का पानी हो या लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी, शहर से बाहर निकलने के लिए योजना के तहत तीन आउटलेट का निर्माण होना है। कल्याणी चौक से कलमबाग-छाता, चौक-दामुचौक होते हुए खबड़ा गांव तक एक आउटलेट, कल्याणी चौक से बाबा गरीब नाथ मंदिर होते हुए मणिकामन तक दूसरा आउटलेट एवं मिठनपुरा चौक से औद्योगिक क्षेत्र होते हुए तिरहुत नहर तक तीसरे आउटलेट का निर्माण होना है। लेकिन वर्तमान में तीन साल से मिठनपुरा चौक से औद्योगिक क्षेत्र होते हुए तिरहुत नहर तक काउटलेट का निर्माण कार्य चल रहा है। शेष दो की अनदेखी की जा रही है। इसकी शिकायत वर्तमान नगर विकास विकास मंत्री तारकिशोर प्रसाद को गई तो उन्होंने नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय को कार्य पर निगरानी रखने का जिम्मा दिया था। नगर आयुक्त लगातार कार्य की निगरानी कर रहे हैं। लेकिन इस आउटलेट का निर्माण हो जाता है तो सिर्फ शहर एक हिस्सा जलजमाव से मुक्ति होगा और शहर के अधिकांश भाग को जलजमाव से निजात नहीं मिल पाएगा।  

Edited By: Ajit Kumar