यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kudhni By-election: पटना और दिल्ली से चली जा रही कुढ़नी चुनाव की चाल...एकदम सिर चकरा देने वाला गेम
Kudhni By-election 2022 दो बड़े दलों के उम्मीदवारों के आधार पर दूसरी पार्टियों ने प्रत्याशी उतारे वोटों के बिखराव को ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर, जासं। Kudhni By-election 2022: एक दौर में उपचुनाव को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था, लेकिन बिहार की मौजूदा राजनीति में यह अहम हो गया है। उपचुनाव को सत्ता और विपक्ष शक्ति प्रदर्शन और लिटमस टेस्ट के रूप में ले रहे हैं। कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव भी इसी दिशा में जा रहा है। उम्मीदवार भले ही स्थानीय हों, चुनाव की दशा और दिशा राज्य और देश की राजधानी से तय हो रही है। एक-एक कदम साध कर रखा जा रहा है। इसका उदाहरण है कि नामांकन के अंतिम दिन 13 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। ये प्रत्याशी सही मायने में उतारे गए थे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनका नामांकन अफरातफरी में हुआ। गड़बड़ी पर नोटिस के बाद भी वे शपथ पत्र सही नहीं भर सके। इस कारण आठ के नामांकन रद हो गए। अगर ये मैदान में रहते तो जरूर 10 से 12 हजार वोटों को प्रभावित कर सकते थे। अब भी आधा दर्जन प्रत्याशी ऐसे हैं जो जीत-हार के अंतर वाले वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो ये उम्मीदवार पटना और दिल्ली से तय किए गए थे। दो बड़े दलों के उम्मीदवारों को देखकर ही सबकुछ तय हो रहा। वोटों का बिखराव चुनाव का बड़ा हथियार साबित होगा।
साधे जा रहे जातिगत समीकरण
वीआइपी ने अपनी उम्मीदवारी भाजपा के बाद तय की। पार्टी सुप्रीमो ने नीलाभ कुमार की उम्मीदवारी के साथ मांछ-भात (सहनी-भूमिहार) समीकरण से जीत का दावा किया। बोचहां में उपचुनाव में राजद चूड़ा-दही (भूमिहार-यादव) समीकरण को भुनाने में सफल रहा था। वीआइपी इस समीकरण के सहारे भाजपा को नुकसान पहुंचाने की तैयारी में है। दूसरी ओर भाजपा इस बार मट्ठा भी फूंक-फूंककर पी रही। नेताओं को ऐसे कुछ भी बोलने से मना किया गया है जो किसी वर्ग को नाराज करे। इसके अलावा पार्टी विधायकों की बड़ी टीम विधानसभा क्षेत्र के गांव-गांव में जम गई है। अभी फीडबैक लिया जा रहा है। इसी आधार पर बाद में बड़े नेताओं को जगह-जगह फिट किया जाएगा। भाजपा उम्मीदवार केदार प्रसाद गुप्ता खुद के क्षेत्र में उपस्थिति की बात तो करते हैं, मगर पीएम के विकास कार्य के नामपर ही वोट मांग रहे।
जदयू का पंचायत प्रतिनिधियों पर फोकस
जदयू की ओर से कमान एक एमएलसी की टीम संभाल रही। इस कारण अभी पंचायत जनप्रतिनिधियों पर फोकस किया जा रहा है। विधायक और मंत्रियों की टीम का चयन किया जा रहा है। एआइएमआइएम के मो. गुलाम मुर्तुजा कितना नुकसान पहुंचा सकते, इसका आकलन कर रहे। उनकी धार को कम करने के लिए स्थानीय मुस्लिम नेताओं को लगाया गया है। इनमें से एक जदयू उम्मीदवार मनोज कुमार सिंह के करीबी भी हैं। ये चीजें पार्टी नेतृत्व के स्तर से तय हो रहे हैं। माना जा रहा कि अंत समय तक उम्मीदवारों से अधिक पटना और दिल्ली की ही धमक सुनाई देगी।