यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kudhni By-election: सात वर्ष पहले जैसी पिच पर रोमांचक मुकाबले की जमीन हो रही तैयार
Kudhni Assembly By-election 2015 जैसे समीकरण के साथ महागठबंधन एवं एनडीए के उम्मीदवार कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में आजमा रहे किस्मत। ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। Kudhni Assembly By-election: जिले की कुढ़नी विधानसभा सीट महागठबंधन और भाजपा नेतृत्व के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। यह वर्ष 2015 जैसे मुकाबले वाली ही पिच है। करीब सात वर्ष की बिहार की राजनीति में कई बदलाव के बाद कहानी फिर वहीं से शुरू हो रही है। महागठबंधन समर्थित जदयू उम्मीदवार मनोज कुमार सिंह उर्फ मनोज कुशवाहा फिर मैदान में हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा से भी फिर केदार प्रसाद गुप्ता ही उतरे हैं। तब केदार गुप्ता ने बड़े अंतर से बाजी मारी थी। 2020 के विधानसभा आम चुनाव में जदयू और भाजपा साथ मैदान में उतरे। सीटिंग होने के कारण केदार भाजपा के उम्मीदवार बने। मनोज कुशवाहा बिना लड़े मैदान से बाहर हो गए। केदार भी सीट नहीं बचा सके। महज 712 वोटों से उनकी हार हुई। अब उपचुनाव ने दोनों को आमने-सामने कर दिया है। सीटिंग होने के बावजूद राजद ने जदयू के लिए सीट छोड़ी है। ऐसे में मनोज कुशवाहा पर भरोसा कायम रखने का दबाव रहेगा। उनके लिए बड़ी राजनीतिक लड़ाई होगी। केदार गुप्ता के लिए भी यह लड़ाई लाटरी की तरह है, क्योंकि वे पांच साल बाद लड़ाई में उतरने की सोच रहे थे।
भाजपा का खेल बिगाड़ना चाह रहे मुकेश
इन लड़ाई में कई और खिलाड़ी अहम होंगे। विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) निलाभ कुमार को मैदान में उतारने की घोषणा कर चुकी है। कुढ़नी के लोकप्रिय विधायक रहे साधु शरण शाही के परनाती हैं। मुकेश सहनी भाजपा का खेल दो तरह से बिगाड़ना चाह रहे हैं। अपनी जाति के साथ महत्वपूर्ण भूमिका वाले भूमिहार वोटों का विखराव कर सकते हैं। दूसरी ओर मनोज कुशवाहा के लिए अपनी जाति के साथ राजद के एमवाय समीकरण वाले परंपरागत वोटों को एकजुट करने की चुनौती होगी। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमएईएम) ने मो. गुलाम मुतुर्जा को मैदान में उतारा है। इससे माय समीकरण पर असर पड़ने की उम्मीद है।
सम्राट चौधरी को चुनाव की कमान
दूसरी ओर चिराग पासवान इस बार खुलकर भाजपा के समर्थन में आ गए हैं। पिछले चुनाव में अनुसूचित जाति के वोट कई दलों में बंट गए थे। चिराग के सहारे भाजपा इसे अपनी ओर करना चाहेगी। महागठबंधन मांझी की मदद से निशाना साधेगी। जिस गठबंधन को इस वर्ग के बहुसंख्यक वोट मिलेंगे उनका पलड़ा भारी रहेगा। इसके अलावा भाजपा ने मनोज कुशवाहा के स्वजाति वोट में सेंधमारी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी को चुनाव की कमान सौंपी है। ऐसे में कुछ वोटों का विखराव तय है। भाजपा यहां बोचहां उपचुनाव की गलती दोहराना नहीं चाह रही। इसलिए सभी जातियों के नेताओं को साथ लेकर चल रही है। उम्मीदवारी से पहले ही पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा को विश्वास में लिया ताकि भूमिहार वोट प्रभावित नहीं हो। लब्बोलुआब यह कि जो दल वोटों को विखराव रोकने में सफल होगा बाजी उनके हाथ होगी।