यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kudhni By-election: सबकुछ तय हो गेल हई, कहां के मत देतई बोलला पर बवाल होतई
Kudhni Assembly By-election उपचुनाव की तिथि में अब बहुत कम दिन रह गए हैं। यूं तो मतदाता कुछ भी बोलने ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर, [अमरेन्द्र तिवारी]। कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव की तिथि ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है, त्यों-त्यों राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है। नेताओं के दौरे हो रहे हैं। इस बार आमसभा की जगह जनसंपर्क, गांव-गांव चौपाल पर जोर है। चुनाव ऐसे समय हो रहा जब रबी की बोआई परवान पर है। सुबह धान की कटनी तो दोपहर में गेहूं की बोआई। इन सब के बीच चौक-चौराहे पर चाय के साथ चुनावी चर्चा से नहीं चूक रहे हैं। किसी के पास जातीय समीकरण का बल है तो कोई सरकार की उपलब्धियों को गिना रहा है। इन सबके बीच मतदाता ने भी अपना मिजाज बना लिया है, लेकिन खुलकर किसी प्रत्याशी का नाम नहीं ले रहे।
खाएगा सब का, गाएगा अपने मन का
कुढ़नी के निराला चौक पर गेहूं की बोआई कराने के लिए निकले पुरुषोत्तमपुर के 72 वर्षीय भुवनेश्वर शर्मा अपनी साइकिल रोककर सुस्ता रहे थे। वहीं दुकानदार शिवचंद्र राय लिट्टी सेंकने में जुटे थे। जब चुनाव पर चर्चा चली तो भुवनेश्वर ने कहा, बबुआ अब जनता बहुत चालाक हो गई है। खाएगा सब का और गाएगा अपने मन का। इहां पर सबकुछ चुपचाप तय हई। दो पाट में जनता बंटल हई। कहां केकरा के वोट देवके हई इस सब जान रहल हई। बाकी केकरो नाम लेला पर बवाल होतई। ए लेल कोई बोलेला तैयार न हई। शर्माजी की बात पर शिवचंद्र राय ने कहा कि पहले पार्टी के लिए लोग लाठी चलाने व खाने के लिए तैयार रहते थे। अब वैसी बात नहीं है। कहा कि 13 आदमी खड़ा है, जीतेगा कोई एक ही। इसलिए जहां वोट देना है वहीं देंगे।
किसानों को अपनी समस्याओं की चिंता
चुनाव के मुद्दे पर रामेश्वर दास ने कहा कि विकास के सवाल हई। सब समाज के वोट जोड़ रहल छी, बाकी इ 50 हजार से ज्यादा दलित के हिसाब सब पर भारी हई। अनिल राय ने कहा कि लालटेन के पारंपरिक वोटर तीर का कितना साथ देंगे। इस बार यह भी माने-मतलब रखेगा। मुकेश कुमार ने कहा कि धान खरीद, खाद की उपलब्धता, बीज वितरण में धांधली किसानों की बड़ी समस्या है। इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। बड़े-बड़े कई वायदे होते हैं। किसानों को हर साल समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। अभी गेहूं की बोआई में कितनी परेशानी हुई। शर्मा ने कहा कि शिवचंद्र भाई लिट्टी बनाउं हम बोआई करा के आ रहल छी।
सामाजिक समीकरण की खूब हो रही चर्चा
इसी तरह से जमहरूआ मालती चौक, रामचंद्रा चौक पर भी किसको मत देंगे, इस पर कोई खुलकर नहीं बोल रहा। बाकी हर जगह चुनावी चौपाल सज रही है। ठंड में चुनावी गर्माहट महसूस की जा रही है। वोटर मुद्दों की राजनीति कर रहे। न वे किसी को हरा रहे, न जिता रहे...बस जनहित के मुद्दे उठा रहे जो हर बार चुनाव में बनते रहे हैं। इधर प्रत्याशी अपने-अपने दल के हिसाब से सामाजिक समीकरण को साधने में जुटे हैं। यह समीकरण अंत तक कितना साथ देगा, यह देखने की बात होगी।