यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kudhni Assembly By-election: महागठबंधन की ओर से कौन-कौन टिकट हासिल करने की रेस में हैं? रोचक है दावेदारी
Kudhni Assembly By-election 2022 बिहार की मोकामा-गोपालगंज सीट के लिए उपचुनाव संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें कुढ़नी विधानसभा ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर, [अमरेंद्र तिवारी]। पछिया के प्रभाव से तापमान में गिरावट जरूर है, लेकिन बिहार की राजनीति में सरगर्मी अभी बरकरार है। मोकामा व गोपालगंज विधानसभा सीट के उपचुनाव संपन्न हाेने के बाद अब सबकी निगाहें मुजफ्फरपुर की कुढ़नी विधानसभा सीट के लिए होने जा रहे उपचुनाव पर टिक गई हैं। यहां पांच दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। इस सीट से टिकट पाने के लिए होड़ लगी है। विशेषकर महागठबंधन में। यह सीट राजद की है। वह स्वाभाविक दावेदार भी है, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि महागठबंधन में उसके सहयोगी दल की ओर से भी दावेदारी की जा रही है। जिससे मामला उलझ गया है। महागठबंधन की अोर से अब तक जो दावेदार सामने आए हैं उससे तो चुनाव से पहले ही मामला रोचक हो गया है। कुछ परेशानी मुकेश सहनी व आेवैसी की पार्टी की घोषणाओं ने भी बढ़ा रखी है।

पूर्व मंत्री का सबकुछ दांव पर
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए की ओर से भाजपा की दावेदारी थी, लेकिन जदयू अब भाजपा से अलग है। ऐसे में राजद की सीट होने के बाद भी सीएम नीतीश कुमार की पार्टी की ओर से मजबूत दावेदारी पेश की जा रही है। अब तक की जानकारी के अनुसार जदयू के कई कद्दावर नेता लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं। सभी समीकरण को अपने पक्ष में होने का दावा पेश कर रहे हैं। खासकर पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा। उनका तो करियर ही दांव पर है। वर्ष 2020 के चुनाव में उनको कुढ़नी की जगह मीनापुर से टिकट दिया गया था, लेकिन उन्होंने चुनाव से पहले ही मैदान छोड़ दिया था। इस बार वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। इसके साथ ही जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के करीबी रहे पूर्व मुखिया रामबाबू कुशवाहा भी अंदर ही अंदर तैयारी में लगे हुए हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का जदयू में विलय होने के बावजूद उन्होंने अपने स्तर से दावेदारी पेश की है।

सहनी-कुशवाहा बिरादरी के नेता आगे
राष्ट्रीय जनता दल की बात करें तो यहां से विधायक रहे डा. अनिल सहनी के परिवार की ओर से अब तक कोई खास दावेदारी सामने नहीं आई है, लेकिन चर्चा है कि वह अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारना चाह रहे हैं। इसके साथ सहनी समाज से आने वाले शेखर साहनी भी मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए दिख रहे हैं। खासकर मुकेश सहनी की घोषणा के बाद उनका पक्ष मजबूत होता दिख रहा है। शेखर सहनी राजद के पुराने कार्यकर्ता हैं। उनका लालू प्रसाद यादव से अच्छा अपनापन रहा है। राजद नेता शंकर कुशवाहा भी राजद के टिकट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। कुशवाहा बिरादरी से आने वाले शंकर कुशवाहा एक सशक्त दावेदार हो सकते हैुं।

ए टू जेड की ओर से भी दावेदारी
उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव हमेशा ए टू जेड की बात करते हैं। वे सबको लेकर चलने का दावा करते हैं। विधान परिषद चुनाव में उनका यह प्रयोग सफल भी हुआ था। यदि उस समीकरण की बात की जाए तो शिवाजी शाही भी महागठबंधन की पसंद हो सकते हैं। उन्होंने भी अपना दावा पेश कर रखा है। शिवाजी शाही भूमिहार बिरादरी से आते हैं। उनका तर्क है कि राजद के परंपरागत वोटर के साथ सवर्ण मतदाताओं का साथ मिलने से सफलता सुनिश्चित हो जाएगी।