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नवरात्रि के लिए बिहार का यह पारंपरिक लोकगीत है खास, शारदा सिन्हा से मैथिली ठाकुर तक ने दी है आवाज

Published: Sun, 18 Oct 2026 02:22 PM (IST)

Sharda Sinha Devi Geet Navratri: नवरात्रि में बिहार, झारखंड और पूर्वी यूपी में 'जगदम्बा घर में दियरा बार अइनी हे' ...और पढ़ें

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के घर-घर में नवरात्रि के दौरान एक पारंपरिक लोकगीत की गूंज सबसे खास होती है।

 बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के घर-घर में नवरात्रि के दौरान एक पारंपरिक लोकगीत की गूंज सबसे खास होती है।

HighLights

  1. 'जगदम्बा घर में दियरा बार अइनी हे' बिहार का पारंपरिक देवी गीत।

  2. शारदा सिन्हा और मैथिली ठाकुर ने इस गीत को दी है आवाज।

  3. नवरात्रि में मां जगदम्बा की भक्ति का प्रतीक यह लोकगीत।

डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। Maithili Thakur Devi Geet:बिहार समेत पूरा सनातन समाज इन दिनों मां दुर्गा की भक्ति और आराधना में डूबा हुआ है। हर ओर दुर्गा सप्तशति के पाठ के साथ ही देवी गीत गूंज रहे हैं।

वैसे तो 'आजा शेरावाली' जैसे भजन हर जगह सुनाई देते हैं, लेकिन बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के घर-घर में नवरात्रि के दौरान एक पारंपरिक लोकगीत की गूंज सबसे खास होती है।

यह गीत है, 'जगदम्बा घर में दियरा बार अइनी हे'। खास बात यह है कि इस लोकगीत को पद्मभूषण डॉ. शारदा सिन्हा से लेकर लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर तक ने अपनी सुमधुर आवाज दी है।

सदियों पुरानी लोक संस्कृति की थाती

यह प्रसिद्ध पारंपरिक देवी गीत मुख्य रूप से मां जगदम्बा (आदिशक्ति) की भक्ति को समर्पित है। यह किसी आधुनिक गीतकार की रचना नहीं, बल्कि मौखिक लोक-परंपरा (Oral Tradition) का वह अनमोल हिस्सा है, जो पीढ़ियों से बिहार और उत्तर प्रदेश के लोकाचार में रचा-बसा है।

शारदा सिन्हा के जादुई कंठ में सजने के बाद इस गीत की ख्याति देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुंची और यह हर घर की सुबह-शाम की प्रार्थना बन गया।

Sharda sinha and Maithili thakur

लोक भावनाओं से ओत प्रोत बोल

इस पारंपरिक गीत के माध्यम से माता के स्वागत, उनके आगमन पर घर में दीप जलाने और गंगाजल से उनके चरण पखारने जैसी पवित्र लोक-भावनाओं को दर्शाया गया है। गीत की पंक्तियां हैं

'सोने सुराही गंगाजल पानी, मैया जी के चरण पखार अइनी हे...' इसके बाद सोने की थाली में व्यंजन परोसकर मां को भोग लगाने और कंचन थार कपूर की बाती से आरती उतारने का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है।

पारंपरिक धुन और समकालीन कलाकारों का स्वर

इस गीत की धुन ठेठ भोजपुरी और मैथिली लोक-संगीत की माटी से जुड़ी है। ढोलक, झाल और मंजीरे की थाप के साथ गाए जाने वाले इस पारंपरिक गीत में जो मिठास है, वह मन को पूरी तरह से भक्तिमय और ऊर्जावान बना देती है।

शारदा सिन्हा के अलावा आज के समय में स्वाति मिश्रा और खुशबू तिवारी समेत कई अन्य प्रतिष्ठित कलाकारों ने भी इस देवी गीत को अपनी आवाज दी है, जो आज भी हमारी आस्था और संस्कृति की जीवंत पहचान बना हुआ है।

दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की के संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर लावण्या कीर्ति सिंह ने इस संबंध में बताया कि यह पारंपरिक देवी गीत सदियों से गया जाता रहा है। शारदा सिन्हा की आवाज मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता में कई गुना वृद्धि हुई। आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ दोनों नवरात्र के मौके पर यह गया जाता है।

 

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