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बिजली के फॉल्ट से नहीं रुकेगी ट्रेन, पूर्व मध्य रेल की परियोजनाओं के लिए बनेगा नया नक्शा

Published: Mon, 19 Oct 2026 02:45 PM (IST)

Indian Railways Power Grid Upgradation: पूर्व मध्य रेल समस्तीपुर और सोनपुर मंडल में ट्रेनों के सुचारु परिचालन के लिए 1.41 ...और पढ़ें

इस पूरी योजना पर करीब 1.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इस पूरी योजना पर करीब 1.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

HighLights

  1. 1.41 करोड़ रुपये की लागत से नया सर्वेक्षण।

  2. बिजली के फॉल्ट से ट्रेनों को रुकने से रोकेगा।

  3. समस्तीपुर-सोनपुर मंडल में विद्युत संरचना होगी मजबूत।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। ECR Samastipur Sonpur Division OHE Plan: पूर्व मध्य रेल (ECR) की विभिन्न रेल परियोजनाओं में ट्रेनों के परिचालन को बाधा रहित बनाने और विद्युत संरचना को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है।

अब 132 केवी एक्स्ट्रा हाई टेंशन (EHT) विद्युत लाइनों का नया सर्वे, रूट प्लान, डिजाइन और ड्राइंग तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक को पार करने वाली उच्च क्षमता की विद्युत लाइनों और ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) व्यवस्था से जुड़े तकनीकी कार्यों का सटीक खाका तैयार होगा। इस पूरी योजना पर करीब 1.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

होगा विद्युतीकरण का सर्वेक्षण

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नई रेल लाइन और दोहरीकरण परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न रेलखंडों में विद्युत व्यवस्था का गहन सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर और सोनपुर मंडल की कई प्रमुख रेल परियोजनाएं शामिल हैं।

मुख्य रूप से नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी, मानसी, खगड़िया, गोल्डेनगंज और कटिहार रेलखंडों में यह काम होगा।

सर्वे और डिजाइन का पूरा कार्य उप मुख्य विद्युत अभियंता (निर्माण), पूर्व मध्य रेल के पर्यवेक्षण में पूरा किया जाएगा।

पावर सप्लाई का बनेगा तकनीकी खाका

परियोजना के अंतर्गत ओएचई वायरिंग डायग्राम, जनरल पावर सप्लाई डायग्राम, सेक्शनिंग डायग्राम और पेगिंग प्लान तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा ट्रैक्शन सब-स्टेशन (TSS), सेक्शनिंग पोस्ट (SP) और सब-सेक्शनिंग पोस्ट (SSP) के सटीक स्थानों का सर्वे कर उनके लिए नक्शे और डिजाइन बनाए जाएंगे।

रेलवे ट्रैक के ऊपर से गुजरने वाली हाई पावर विद्युत लाइनों की क्रॉसिंग से जुड़े सभी सेफ्टी और तकनीकी पहलुओं का भी आकलन होगा ताकि ट्रिपिंग की समस्या न रहे।

36 महीने में पूरा करने का लक्ष्य

इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 36 महीने यानी तीन साल की समयसीमा तय की गई है। इस तकनीकी सर्वेक्षण और सटीक डिजाइनिंग से नई रेल लाइनों और दोहरीकरण परियोजनाओं में बिजली आपूर्ति की आवश्यकताओं का पहले ही सटीक आकलन हो जाएगा, जिससे भविष्य में ट्रेनें पावर कट या फॉल्ट की वजह से बीच रास्ते में नहीं खड़ी होंगी।

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