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रेलवे के 'विश्वस्तरीय' दावों को कुतर रहे चूहे! अंत्योदय एक्सप्रेस में उसकी भागदौड़ से खुली पोल

Published: Fri, 23 Oct 2026 05:55 AM (IST)

Antyodaya Express Rats Problem: वाराणसी से दरभंगा जाने वाली अंत्योदय एक्सप्रेस में चूहों का आतंक बढ़ गया है, जिससे रेलवे ...और पढ़ें

चूहों की धमाचौकड़ी ने रेलवे के स्वच्छता और सुंदरीकरण के तमाम दावों की हवा निकाल दी है।

 चूहों की धमाचौकड़ी ने रेलवे के स्वच्छता और सुंदरीकरण के तमाम दावों की हवा निकाल दी है।

HighLights

  1. अंत्योदय एक्सप्रेस में चूहों का बढ़ता आतंक जारी।

  2. रेलवे के स्वच्छता और विश्वस्तरीय दावों की खुली पोल।

  3. यात्रियों ने प्रभावी पेस्ट कंट्रोल की मांग की है।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Antyodaya Express Rats Problem: एक तरफ देश में रेलवे को 'विश्वस्तरीय' और बुलेट ट्रेन के युग में ले जाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ हकीकत यह है कि पटरियों पर दौड़ती आम जनता की गाड़ियों (ट्रेनों) में चूहों और सांपों का 'वीआईपी मूवमेंट' बदस्तूर जारी है।

कभी बोगी में सांप के निकलने से यात्रियों की सांसें अटक जाती हैं, तो कभी चूहों के झुंड कुर्सियों पर ऐसे इठलाते हैं जैसे वे ही ट्रेन में मुख्य हैं।

ताजा मामला वाराणसी सिटी से दरभंगा जाने वाली (15552) अंत्योदय एक्सप्रेस का है, जहां चूहों की धमाचौकड़ी ने रेलवे के स्वच्छता और सुंदरीकरण के तमाम दावों की हवा निकाल दी है।

indian railways antyodaya express rats menace muzaffarpur  (1)

चूहा भगाने के वादे फेल

ट्रेनों में चूहों का यह कोई पहला मामला नहीं है। अक्सर जब भी बोगियों में चूहों के आतंक की शिकायत सामने आती है, तो रेल अधिकारी 'पेस्ट कंट्रोल' कराकर चूहों को भगाने का रटा-रटाया दावा कर देते हैं।

लेकिन, हकीकत यह है कि लाख कोशिशों के बाद भी ये चूहे ट्रेन की बोगियों से जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। अंत्योदय एक्सप्रेस में सफर कर रहे यात्री इन दिनों चूहों के इस आतंक से बुरी तरह त्रस्त हैं।

स्थिति यह है कि यात्रियों का सामान और खाने-पीने की चीजें सुरक्षित रखना तक मुश्किल हो गया है।

फीडबैक अभियान के बीच खुली पोल

एक तरफ रेलवे प्रशासन स्टेशनों पर और ट्रेनों के भीतर यात्रियों से 'फीडबैक' लेकर सुविधाओं का ढोल पीट रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रेन के भीतर घूम रहे चूहे यात्रियों से बिना मांगे ही अपनी मौजूदगी का फीडबैक दे रहे हैं।

रेलवे के अधिकारी यात्रियों से उनकी समस्याएं और सुझाव पूछने में जुटे हैं, लेकिन बोगियों के भीतर पसरी इस बदहाली और गंदगी पर उनका ध्यान शायद ही कभी जाता है।

अमृत भारत और वंदे भारत के इस दौर में यदि अंत्योदय एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में यात्रियों को चूहों और सांपों के साथ सह-यात्रा करनी पड़े, तो यह समझा जा सकता है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में कितना फासला है।

बहरहाल, यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि केवल कागजी खानापूर्ति और फीडबैक लेने के बजाय ट्रेनों में प्रभावी पेस्ट कंट्रोल कराया जाए, ताकि लोग चैन की सांस लेकर अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।

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