'चरित्र का संकट सबसे बड़ा', मुजफ्फरपुर में बोले राज्यसभा उप सभापति हरिवंश वेद और रामायण से प्रेरणा लें युवा
Moral Education In India: राज्यसभा उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह ने मुजफ्फरपुर में 'आधुनिक शिक्षा में नैतिक सशक्तिकरण की आवश्यकता' ...और पढ़ें

अबोध देवी स्मृति व्याख्यान माला को संबोधित करते राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह।
HighLights
राज्यसभा उप सभापति हरिवंश ने नैतिक सशक्तिकरण पर दिया जोर।
उन्होंने कहा, वर्तमान में चरित्र का संकट सबसे बड़ा वैश्विक मुद्दा।
युवाओं को भारतीय संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
प्रशांत कुमार, मुजफ्फरपुर। Abodh Devi Smriti Vyakhyanmala: लंगट सिंह महाविद्यालय के आचार्य जेबी कृपलानी सभागार में शनिवार को 'अबोध देवी स्मृति व्याख्यान माला' का आयोजन किया गया।
'आधुनिक शिक्षा में नैतिक सशक्तिकरण की आवश्यकता' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह रहे। उन्होंने कहा कि घर, स्कूल और समाज मिलकर ही किसी मनुष्य के चरित्र का निर्माण करते हैं।
चरित्र का संकट सबसे बड़ा
उप सभापति ने कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े विद्वान मान रहे हैं कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा संकट चरित्र का ही है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सदैव चरित्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने पुरानी कहावत दोहराई कि धन या स्वास्थ्य खोने से बढ़कर चरित्र का खोना जीवन की सबसे बड़ी क्षति होती है।
धार्मिक ग्रंथों से लें प्रेरणा
हरिवंश नारायण सिंह ने युवाओं से रामायण, महाभारत, वेद और उपनिषद से प्रेरणा लेकर चरित्र निर्माण को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अब गांधी, गीता और भारतीय दर्शन पढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में हम अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर ही अपना स्वर्णिम इतिहास लिख सकते हैं।
केवल डिग्री तक सीमित न रहें
कार्यक्रम में बोचहां विधायक बेबी कुमारी ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं बल्कि एक संवेदनशील नागरिक बनाना है।
जीवन में नैतिक मूल्य ही व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एलएस कॉलेज की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कनु प्रिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
बदलते परिदृश्य में नैतिक मूल्य
प्राचार्य प्रो. कनु प्रिया ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर चरित्र निर्माण पर ध्यान देना होगा।
मंच संचालन पूर्णिया विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलसचिव डॉ. कौशल किशोर चौधरी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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