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एलएस कॉलेज की तरफ बनेगा बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का उत्तरी द्वार, सिंडिकेट ने दी मंजूरी

Published: Sat, 19 Sep 2026 01:54 PM (IST)

BRABU Syndicate Meeting: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय को एलएस कॉलेज की ओर एक नया उत्तरी प्रवेश द्वार मिलेगा, जिसे सिंडिकेट की ...और पढ़ें

कुलपति प्रो. डीसी राय की अध्यक्षता में सिंडिकेट की बैठक आयोजित की गई।

कुलपति प्रो. डीसी राय की अध्यक्षता में सिंडिकेट की बैठक आयोजित की गई।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। BRABU Muzaffarpur News: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय का एक और नया उत्तरी प्रवेश द्वार एलएस कॉलेज की तरफ बनाया जाएगा।

इसके निर्माण के बाद विश्वविद्यालय परिसर में कुल दो प्रवेश द्वार हो जाएंगे। नए द्वार पर विश्वविद्यालय का नाम और स्थापना वर्ष भी स्पष्ट रूप से अंकित रहेगा।

कुलपति प्रो. डीसी राय की अध्यक्षता में आयोजित सिंडिकेट की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया था।

सिंडिकेट से प्रस्ताव मंजूर

सिंडिकेट की बैठक में कुलपति के इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी गई। पूर्व में भी विश्वविद्यालय के दो प्रवेश द्वार बनाने का प्रस्ताव सिंडिकेट में रखा गया था।

हालांकि, पुराने प्रस्ताव में संशोधन करते हुए उत्तरी गेट का निर्माण पूर्व निर्धारित स्थल से थोड़ा आगे बढ़ाकर कराने का निर्णय लिया गया है।

जूलोजी विभाग का बदलाव

इससे पहले विश्वविद्यालय के जूलोजी विभाग के समीप प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित था।

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा ने बताया कि एकेडमिक काउंसिल से पारित प्रस्तावों को सिंडिकेट से अनुमोदित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तरी द्वार का निर्माण प्रस्ताव पास होने के बाद जल्द शुरू होगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा शामिल

विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर (पीजी) के 33 विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा की पढ़ाई शुरू कराई जाएगी। इसे वैल्यू ऐडेड कोर्स के रूप में पीजी प्रथम सेमेस्टर में दो क्रेडिट के साथ शामिल किया जाएगा।

एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट से पारित होने के बाद इस पाठ्यक्रम को अंतिम मंजूरी के लिए लोकभवन भेजा जा रहा है।

लोकभवन से तैयार कोर्स

एकेडमिक काउंसिल की बैठक के दौरान कई विभागाध्यक्षों ने उर्दू और पर्सियन समेत अन्य विषयों में पाठ्यक्रम तैयार न होने का मुद्दा उठाया।

इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह पाठ्यक्रम लोकभवन की ओर से तैयार कराया गया है। इसके अलावा नए डिग्री कॉलेजों के संविदा शिक्षकों से जुड़ा अहम फैसला लिया गया।

निकटवर्ती कॉलेजों से टैगिंग

नए डिग्री कॉलेजों में कार्यरत संविदा आधारित सहायक प्राध्यापक अब निकटवर्ती अंगीभूत महाविद्यालयों में भी कक्षाएं लेंगे। इन शिक्षकों को आसपास के कॉलेजों से टैग करने का प्रस्ताव जल्द लोकभवन भेजा जाएगा।

नए कॉलेजों में नामांकित छात्रों की कम संख्या को देखते हुए शिक्षकों को अध्यापन का बेहतर अवसर देने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

भारतीय न्याय संहिता लागू

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के निर्देश पर लॉ के पाठ्यक्रम में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दे दी गई है।

अब लॉ के नए पाठ्यक्रम में आईपीसी के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके साथ ही लॉ कॉलेजों के निरीक्षण के लिए छह सदस्यीय कमेटी के गठन का प्रस्ताव भी पारित हुआ।

अंकपत्र पर असमंजस कायम

दूसरी ओर, चार वर्षीय स्नातक कोर्स के अंकपत्रों में एकरूपता को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

पहले बैच के छात्र छठे सेमेस्टर की परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन ग्रेड, अंक या सीजीपीए का प्रारूप तय नहीं हो पाया है। विश्वविद्यालय ने अन्य संस्थानों के अंकपत्रों का अध्ययन तो किया है, लेकिन निर्णय होना अभी बाकी है।

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