कश्मीरी कारीगरी और गुजराती मिरर वर्क वाले झुमकों की मची धूम, मुजफ्फरपुर के दुर्गा पूजा मेले में नए ट्रेंड का क्रेज
मुजफ्फरपुर के बाजार में गुजराती झुमके और कश्मीरी कारीगरी का फ्यूजन ट्रेंड में है, जो त्योहारों के सीजन में लड़कियों और महिलाओं की पहली पसंद बन रहा है।

हरिसभा चौक पर राधाकृष्ण मंदिर के सामने स्टैंडी पर सजी आर्टिफिशियल ज्वेलरी और खरीदारी करतीं युवतियां। (जागरण)
HighLights
गुजराती झुमके और कश्मीरी कारीगरी का फ्यूजन ट्रेंड।
कॉलेज छात्राओं और महिलाओं की पहली पसंद बने।
त्योहारों के बाजार में 150-600 रुपये में उपलब्ध।
अजय पांडेय, मुजफ्फरपुर। बरेली के बाजार में झुमका गिरने की बात पुराने दौर की है, अब तो गुजरात का झुमका खनक, चमक रहा। त्योहारों के बाजार में नया ट्रेंड है।
कश्मीरी कारीगरी वाले चांदी जैसे झुमकों पर गुजराती मिरर वर्क और रंगीन धागों की छटा। कान में डोलते-झूलते ही पहाड़ी हवाओं सी हल्की कश्मीरियत और कच्छ के मेले जैसा चटक अंदाज एक साथ...।
कॉलेज से लेकर गरबा पंडाल तक लड़कियों की पहली पसंद बन रहा ये फ्यूजन लुक। स्टैंडी में चलती-फिरती दुकान पर भीड़ ऐसी कि झुमका पसंद करना भी जद्दोजहद।
छात्राएं कहती हैं...हल्का है, पूरे दिन पहन सकते और हर ड्रेस पर चलता है। महिलाएं भी पीछे कहां, दो-दो, तीन-तीन जोड़ी ले रहीं। देवी मंदिर के पास डिजाइन पसंद कर रहीं डॉ. रितुल कहती हैं, अभी तो फेस्टिव सीजन है। यह आइटम भी ट्रेंडी है, आप हर टाइम गोल्ड नहीं पहन सकते।
हरिसभा चौक पर स्टैंडी के साथ खड़े चंदन बताते हैं कि वैसे तो यह साल भार का काम है, लेकिन दशहरा से लेकर छठ तक खास होता है।
नवरात्र के दो दिन के मेले में 10 से 12 हजार का माल बिक जाता है। मेटलिक आर्टिफिशियल आभूषण गुजरात के राजकोट से मंगाया जाता है। अभी कोरियन स्टड्स, कश्मीरी झुमका, बाली, टाप्स, प्लेन झुमका का खूब क्रेज है। 150 से 600 रुपये तक की रेंज में यही फ्यूजन ट्रेंड में है।
खिलखिलाता खिलौना बाजार
मेले में खिलौना बाजार खिलखिला रहा। देवी मंदिर के सामने दुकान लगाए खिलौना कारोबारी अमन बताते हैं कि खिलौने का सबसे बड़ा बाजार दशहरा ही होता है, जहां दुकान से हटकर कारोबार होता है।

दक्षिण भारत से मंगाए गए शंखों से निर्मित चाबी के छल्ले।
हम जितने महीने में नहीं बेच पाते, उससे ज्यादा दो से तीन दिन के मेले में कमा लेते हैं। दो से तीन दिन के मेले में एक स्टाल से औसतन 40 से 50 हजार तक के कारोबार की उम्मीद जताते हैं।
मुजफ्फरपुर में खनक रहा जयपुर का कंगन
मोतीझील में कंगन-बाला की दुकान लेकर आए बरेली के अशरफ यहां का मेला देखकर खुश हैं। कहते हैं, मेले में हर वर्ग के लोग कुछ न कुछ खरीदारी करते हैं। पैदल चलने वाले भी ले जाते हैं तो कार वाले भी...।
मेटल, ब्रास, कांच हर तरह के बाला की डिमांड होती है। इधर, दक्षिण भारत से शंख की चाबी रिंग का कलेक्शन लेकर आए अजय पासवान भी बिक्री से खुश हैं। कहते हैं, फैंसी आइटम है, आते-जाते लोग खरीद रहे।
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