मधुबनी, [आमोद कुमार झा]। बांध ही इनका आसरा है। सिर पर पॉलीथिन शीट का छप्पर और सामने जिंदगी की अथाह दुश्वारियां।  मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड की बररी पंचायत के नवगाछी गांव में आधे दर्जन से अधिक परिवार बाढ़ से विस्थापित होकर विगत एक माह से बाढ़ सुरक्षा बांध पर शरण लिए हुए हैं। विस्थापित होकर बांध पर शरण लिए इन बाढ़ पीडि़त परिवारों के समक्ष गंभीर संकट  है।  

तबाही-बर्बादी का मंजर

बाढ़ के पानी से घर उजड़ चुके हैं। बांध से ही तबाही व बर्बादी का मंजर ये लोग देखने को विवश हैं। लेकिन अपने घर वापस जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। हालांकि बाढ़ का पानी उतर गया है। फिर भी परेशानियां हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है।  विनाशकारी बाढ़ ने नवगाछी गांव के बाढ़ पीडि़तो को लाचार बनाकर छोड़ दिया है।  बांध पर विस्थापित होकर मवेशियों के साथ आधे दर्जन परिवार भाग्य भरोसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

पीडि़तों की अंतहीन व्यथा

नवगाछी बांध पर विस्थापित सुबोध सहनी, लखन सहनी, शियाशरण सहनी, फेकन राम, मखन सहनी, सकली देवी, मरनी देवी, सरस्वती देवी, कैवला देवी, मुन्नी देवी, सुमित्रा देवी कहती हैं कि बाढ़ से घर उजड़ गया है। एक माह से बांध पर विस्थापित होकर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ का पानी तो निकल गया है लेकिन घर गिर जाने के कारण अब रहने का ठिकाना नहीं है। हम गरीबों को देखने वाला कोई नहीं है। सरकारी स्तर से कोई राहत नहीं मिली है। एक छटांक चूड़ा तक नहींं मिला है हमें।  प्रशासन के लोग देखने भी नहीं आए हैं। किसी तरह समय व्यतीत कर रहे हैं।  बूढ़ी आंखो में बाढ़ का खौफ और बच्चों की पीड़ा बाढ़ की तबाही का आलम बयां कर रही है। बांध पर जगह-जगह पॉलीथिन शीट्स टंगे हुए हैं जिनके नीचे बाढ़ पीडि़त अपना बसेरा बनाकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। 

राहत का आग्रह  

भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्या खुश्बू कुमारी तथा भाजपा नेता भास्कर चौधरी ने सरकार एवं प्रशासन से बाढ़ से विस्थापित लोगों के बीच राहत व बचाव कार्य चलाए जाने का आग्रह किया है।

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