मुजफ्फरपुर। शहर में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। जर्जर हो चुके पुराने वाहनों का परिचालन बेरोकटोक जारी है, जो प्रदूषण फैलाते हैं। इसके साथ ही नालियों से निकाला गया कचरा सड़क पर ही छोड़ दिया जा रहा है। जिसके कारण शहरवासी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

निगम के पास पानी छिड़काव का टैंकर भी कम हैं। धूल को शांत करने के लिए दो-तीन टैंकरों में पानी भरकर कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में छिड़काव कर छोड़ दिया जा रहा।

सड़कों पर कीचड़ निकाल कर छोड़ दिया जा रहा है। शहर में करीब 25 हजार ऑटो होंगे, इनमें से अधिकांश जहरीला धुआं उगल रहे हैं। जेनरेटर के इंजन से बनने वाले जुगाड़ वाहन का धुआं लोगों के फेफड़ों में सीधा जा रहा है। स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने में प्रयोग किए जा रहे कई वाहन भी पुराने हो चुके हैं। इनसे निकल रहा धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाने में सहायक हो रहा है।

हालांकि, वायु प्रदूषण से निपटने के लिए निगम प्रशासन ने बुधवार रात शहर के कई मार्गो पर पानी का छिड़काव कराया। एक दिन के छिड़काव से प्रशासन मान लिया कि वायु प्रदूषण कम हो गया।

शहरवासियों को स्मार्ट सिटी का सपना दिखा रहे नगर निगम की लापरवाही भी प्रदूषण बढ़ाने में सहायक बन रही है। एनएच किनारे, दीघरा, दादर सहित अन्य जगहों पर कचरा जलाया जा रहा है। इससे उठने वाले धुएं से लोगों में सांस की बीमारी फैल रही है। प्रतिदिन दर्जनों मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं। वहीं, कुछ लोग खराब टायर जलाकर उसमें से तार निकालते हैं। उससे काफी जहरीली धुंआ निकलता है। जिससे पेट और छाती की बीमारी बढ़ रही है। निगम या जिला प्रशासन भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। शहर की कई सड़कों के खस्ताहाल होने से उड़ रही धूल वातावरण में जहर घोल रही है। जवाहरलाल रोड, हरिसभा से मुखर्जी सेमिनरी स्कूल की तरफ जाने वाली गली, मोतीझील में बीबी कॉलेजिएट स्कूल की गली सहित दर्जनों मार्गो की मरम्मत की जरूरत है।

Posted By: Jagran

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