सीतामढी, जेएनएन। सरकार की गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा की घोषणा महाविद्यालयों की व्यवस्था व शिक्षकों की कमी धराशाई कर रही है। कॉलेजों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ ही शिक्षकों का अभाव शैक्षणिक गुणवत्ता पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है। इतना ही नहीं शिक्षकों व प्राचार्य की उदासीनता के कारण शैक्षणिक माहौल ही पूर्णतया शुन्य हो चला है। महाविद्यालय मात्र नामांकन व रिजल्ट के लिए ही बनी हुई प्रतीत होने लगी है। शिक्षकों का विद्यालय से अनुपस्थित रहना तथा केवल हस्ताक्षर व गप्पे मारना माहौल की और अधिक बर्बाद कर रहा है।

  शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी बायोमेट्री में हाजिरी लगाकर पुन: अपने काम में लग जाते हैं और पुन: हाजिरी लगाने के समय आकर बायोमेट्री में अपनी उपस्थिती दर्ज करते हैं। प्राचार्य की भी लगभग यही स्थिति बनी हुई होती है। वे प्राय: किसी बहाने कॉलेज से लापता ही रहते देखे जाते हैं। शिक्षकों की कमी को लेकर विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेज से रिक्तियां मांगी गई, महाविद्यालयों ने सूची भी भेज दी है, लेकिन इस पर अभी पर कोई अग्रेत्तर कार्रवाई नहीं हुई है। महाविद्यालयों में वर्ग संचालन भी यदा-कदा ही होता है, जिससे छात्रों की उपस्थिति भी कॉलेजों में कम ही रहती है। इसके कारण महाविद्यालयों में पठन पाठन की सभ्यता ही धराशाही हो चुकी है।

दस हजार छात्र के लिए मात्र नौ शिक्षक

जिले का प्रथम व अंगीभूत श्री राधाकृष्ण गोयना कॉलेज की स्थापना वर्ष 1948 में ही हुआ था। इसमें वर्तमान में इंटर से पीजी लेकर पीजी तक करीब दस हजार छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। लेकिन कॉलेज में शिक्षकों के श्रृजित पद 76 के स्थान पर महज नौ ही शिक्षक हैं। वहीं शिक्षकेत्तर 65 कर्मचारियों में 20 कार्यरत हैं। विद्यालय में प्रयोगशाला है लेकिन संचालन के लिए कोई कर्मचारी नहीं है।

  इधर विज्ञान के तीन संकायों में एक ही शिक्षक हैं। तो कॉमर्स विभाग में शिक्षक हैं ही नहीं, लेकिन विभाग संचालित है। वहीं गणित में एक, दर्शनशास्त्र में एक, मनोविज्ञान में एक, ङ्क्षहदी में एक व अंग्रेजी में तीन शिक्षक हैं। हालांकि कॉलेज की शिक्षण व्यवस्था व्यवस्थित करने के लिए गेस्ट शिक्षकों का इंतजार किया जा रहा है।

बंद रहता है गर्ल्स कॉमन रूम

महाविद्यालय में वर्षो पूर्व बने गर्ल्सू कॉमन रूम महज एक परिचारिका के अभाव में बंद है। इस कारण छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खेलकूद के साथ ही अन्य क्रियाकलाप भी खानापूर्ति के भेट चढ़ चुकी है। पेयजल के लिए आरओ तो लगाए गए हैं लेकिन वे प्राय: बंद ही पाया जाता है। इधर परिसर में निर्मित जलाशय भी सूखा ही रहता है, इसके साथ ही इसकी देखरेख भी बंद हो चुकी है।

   स्थिति यह है कि कॉलेज में संचालित एनसीसी में भी छात्र-छात्राओं का आकर्षण नहीं रह गया है। हालांकि विकास को लेकर सरकार द्वारा सभा कक्ष, खेल मैदान, कॉमन रूम, जलाशय, शौचालय आदि की बेहतर व्यवस्था है। छात्र- छात्राओं ने बताया कि शिक्षक की बात करना ही बेमानी है जब प्राचार्य ही प्राय: महाविद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं। इधर लाइब्रेरी में करीब 15 हजार पुस्तक है, लाइब्रेरियन है लेकिन छात्रों का आकर्षण नहीं होने के कारण महज पांच से हजार पुस्तक ही छात्र-छात्राएं उपयोग करते हैं।

   मधुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षको के अभाव से शैक्षणिक कार्य सदैव बाधित रहता है। इधर वेतन भी चार-चार महीने से लंबित है। विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों की समस्या के लिए कॉलेज में आवेदन लिया जाता है, लेकिन इसका समाधान विश्वविद्यालय करता ही नहीं है। जिसके कारण यदा कदा कॉलेज का माहौल विषाक्त हो जाता है।    प्रो गुलाब सिंह ने कहा कि शिक्षकों के बिना शैक्षणिक माहौल कैसे बन सकता है। विश्वविद्यालय महज आश्वासन ही देने में लगा है। हमें विभिन्न फैकेल्टी के गेस्ट शिक्षक का इंतजार है। इसके साथ ही शैक्षणिक माहौल को बनाने के लिए कॉलेज प्रशासन को भी सौहार्दपूर्ण समुचित कदम उठाने की जरूरत है।

प्राचार्य ने कहा- शिक्षकों की कमी का विवि को भेजा गया प्रतिवेदन

श्री राधाकृष्ण गोयना कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राम नरेश पंडित रमण ने कहा कि लाईब्रेरी का संचालन स्थायी रूप से हो रहा है। शिक्षकों की कमी के लिए विश्वविद्यालय को प्रतिवेदन भेज दिया गया है। इसके साथ ही व्यक्ति स्तर पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया गया है। इधर महाविद्यालय में सृजित पद भी कम है। वर्तमान में छात्राओं की संख्या देखते हुए महाविद्यालय में पठन-पाठन एवं अन्य व्यवस्था सही ढंग से संचालन के लिए शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।

 

Posted By: Ajit Kumar

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