मुजफ्फरपुर, जेएनएन। उपमहापौर मानमर्दन शुक्ला ने 6 अगस्त को महापौर द्वारा बुलाई गई बोर्ड की बैठक के औचित्य पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मंगलवार को नगर आयुक्त मनेश कुमार मीणा को पत्र लिखकर कहा है कि बैठक मे मूकदर्शक बनकर बैठने से क्या फायदा? बैठक बुलाने से पहले कम से कम पार्षदों से एजेंडे लिए जाने चाहिए थे। समस्याओं पर विमर्श होना चाहिए था, ताकि ठोस योजना तैयार कर बैठक में रखा जाता और उसे पारित किया जाता। उन्होंने पत्र में नगर आयुक्त से सभी पार्षदों से उनका एजेंडा लेने को कहा है। बैठक में लिए गए निर्णयों को अनुपालन होना चाहिए था, लेकिन कुछ नहीं होता। कागज पर बैठक होकर रह जाती है। जनता को इससे कोई लाभ नहीं मिलता। 

बड़े पद पर बैठने का मतलब यह नहीं कि मनमानी की जाए 

निगम के अधिकारी व कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं। वे न जनता का फोन उठाते हैं और न ही पार्षदों का। उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि बड़े पद पर बैठने का यह मतलब नहीं कि मनमानी की जाए। निगम परिवार के किसी सदस्य की न सुनी जाए। शहर के कई इलाके जलजमाव से पीडि़त है। कुछ बाढ़ की चपेट में हैं। सफाई व्यवस्था पटरी से उतर गई है। पार्षदों को जनता का कोपभाजक बनना पड़ रहा है। समस्या आने पर जब वे निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों से सहयेाग मानते हैं तो कोई उनकी बात नहीं सुनता। उन्होंने नगर आयुक्त से ऐसे पदाधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। 

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