बगहा (पचं) [तूफानी चौधरी]। वीटीआर (वाल्मीकि टाइगर रिजर्व) में बीते कुछ महीनों से चर्चा का केंद्र बना 'दाराÓ नामक बाघ अचानक अपने इलाके से गायब हो गया है। गोबद्र्धना व मंगुराहा वन क्षेत्र में अपना अधिवास बनाने वाला दारा आए दिन ट्रैप कैमरे में नजर आता था। लेकिन, करीब तीन महीने से उसका मूवमेंट नगण्य है। अधिकारी इसकी खोजबीन में जुटे हैं। वनकर्मियों की टीम को इस कार्य में लगाया गया है।

 वीटीआर में अलग-अलग बाघों की पहचान उनकी धारियों व कद-काठी से होती है। हालांकि, यहां बाघों के नामकरण की परंपरा नहीं है। लेकिन, दारा अन्य बाघों की अपेक्षा मजबूत कद-काठी का है। इसलिए वन अधिकारियों ने उसका नाम दारा सिंह रखा था। उसकी उम्र तकरीबन साढ़े चार साल है। बाघों की हर गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीटीआर में 300 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा वीटीआर के दोनों वन प्रमंडलों में एक-एक ड्रोन कैमरा भी है। लेकिन, किसी कैमरे में दारा की लोकेशन नहीं मिल रही है।

माना जा रहा है कि दारा बरसात शुरू होने के बाद भ्रमण के क्रम में नेपाल के चितवन नेशनल पार्क चला गया है। वन अधिकारियों के अनुसार वीटीआर और चितवन नेशनल पार्क की सीमा खुली है। दोनों रिजर्व क्षेत्र के जानवर सरहद पार करते रहते हैं।

वीटीआर में बाघों की संख्या 40 के पार

890 वर्ग किलोमीटर में फैले वीटीआर में 40 से अधिक बाघ हैं। वर्ष 2010 में यहांं महज आठ बाघ बचे थे। तब सरकार के समक्ष बाघों का अस्तित्व बचाने की चुनौती खड़ी हो गई थी। सरकार ने अनुकूल परिस्थितियां बनाने के लिए रिजर्व क्षेत्र में कई बदलाव किए। शाकाहारी जानवरों के लिए ग्रास लैंड विकसित किए गए। पेयजल संकट दूर करने के लिए जगह जगह वाटर हॉल बनाए गए। शिकार पर अंकुश लगाने के लिए शिकार निरोधी दस्ते का गठन हुआ। इससे बाघों की संख्या बढ़ी।

इस बारे में वीटीआर के मुख्य वन संरक्षक एचके राय ने कहा कि वीटीआर के 11 में दो वन क्षेत्रों गोबद्र्धना व मंगुराहा में दारा अक्सर चहलकदमी करता देखा जाता था। यह चितवन नेशनल पार्क से जुड़ा है। उसके लोकेशन के लिए वनकर्मियों की टीम लगाई गई है। 

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