मुजफ्फरपुर : कोविड-19 वैश्विक महामारी का प्रभाव शारीरिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर पड़ा है। युवा और छात्र-छात्राओं पर इसका अधिक प्रभाव हुआ है। भय, चिता और तनाव ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को बहुत प्रभावित किया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से विवि को छात्रों को इससे उबारने के लिए एक ऑनलाइन कोर्स शुरू करने का निर्देश दिया है। जारी पत्र में कहा गया है कि इस संकट से निकलने के लिए युवाओं में भावनात्मक बुद्धिमत्ता विकसित करनी होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) -2020 के अनुसार, सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा किसी भी छात्र के समग्र विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है। नीति में यह भी सिफारिश की गई है कि उच्च शिक्षा संस्थानों को परामर्श कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक-भावनात्मक व शैक्षणिक सहायता और सलाह प्रदान करने की आवश्यकता है। इसको लेकर यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (एमजीआईईपी) और लाइफ यूनिवर्सिटी (यूएसए) के सहयोग से अनुकंपा अखंडता प्रशिक्षण स्व-निर्देशित शिक्षण (सीआइटी-एसडीएल) पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। यह पाठ्यक्रम अपडेटेड और ऑनलाइन मोड में विकसित किया गया है। यह कोर्स युवाओं को 10 प्रकार के कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। आत्म-नियमन में कौशल, आत्म-करुणा, दूसरों के लिए करुणा, और जटिल प्रणालियों के साथ जुड़ाव, शरीर और दिमाग को शांत करने के लिए कौशल, छात्रों और कर्मचारियों को उनके संबंधित काम में, साथियों, वरिष्ठों, नेताओं, हितधारकों और उनके परिवारों के साथ बेहतर व्यवहार करता है। पाठ्यक्रम 30 घंटे का है। इस प्रशिक्षण में शामिल होने वाले शिक्षार्थियों को यूनेस्को एमजीआईईपी और लाइफ यूनिवर्सिटी से विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा। यह 21वीं सदी के भावनात्मक बुद्धिमत्ता कौशल पर पाठ्यक्रम विज्ञान आधारित है। साथ ही वैश्विक नागरिक बनाने के लिए सामाजिक और भावनात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए एनईपी-2020 के लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान देगा। यूजीसी की ओर से कहा गया है कि छात्रों को पाठ्यक्रम का विवरण उपलब्ध कराएं क्योंकि भावनात्मक बुद्धिमत्ता कौशल विकसित करना अधिक पूर्ण और सफल जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण है।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप