मुजफ्फरपुर,[प्रमोद कुमार]। न शिकवा न ही कोई शिकायत। नगर निगम के प्रति कोई गुस्सा भी नहीं कि सफाई कर्मी अपना काम ठीक से नहीं करते। स्वच्छता से उन्हें प्यार है, इसीलिए 65 वर्ष की उम्र में भी अशोक कुमार सिंह प्रतिदिन अपने मोहल्ले सराय सैयद अली लेन नंबर एक की सफाई करते हैं। सड़क पर झाड़ू लगाते हैं। जमा कचरे को डंपिंग प्वाइंट पर डालते हैं। नाले की उड़ाही करते। बीते 19 साल से उनका यह कार्य लगातार जारी है। कोरोना काल में भी वे इस अभियान में लगे हैं।

2001 में नौकरी छोड़ परिवार के पास मुजफ्फरपुर लौटे

अशोक मुंबई की फॉर्मा कंपनी में कर्मचारी थे। वे मूलत: सीतामढ़ी के कुंडल गांव के निवासी हैं। यहां खेती-बाड़ी व जमीन-जायदाद की देखरेख करने वाला कोई नहीं था। इसके चलते वर्ष 2001 में नौकरी छोड़ परिवार के पास मुजफ्फरपुर लौट आए। जब यहां आए तो सराय सैयद अली लेन नंबर एक मोहल्ले में गंदगी का अंबार दिखा। सफाईकर्मी कभी आते नहीं थे। नाले की उड़ाही नहीं होती थी। इस नारकीय स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने खुद आगे आने का निर्णय लिया।

यह नियमित अभियान सा बन गया

अकेले गंदगी के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी। झाड़ू उठाई और सड़कों की सफाई में जुट गए। नाली की सफाई की। इसके बाद तो यह नियमित अभियान सा बन गया। आज भी सुबह छह बजे से 10 बजे तक सफाई का काम बेझिझक करते हैं। राह से गुजरने वाले बहुत से लोग उन्हें निगम का सफाईकर्मी समझ लेते हैं। लेकिन, उन्हें इसकी परवाह नहीं होती। वे स्वच्छता की मशाल जलाए हुए हैं। उनकी पत्नी भी प्रोत्साहित करती हैं।

सब मिलकर लड़ें तो शहर होगा स्वच्छ व सुंदर

अशोक कहते हैं कि लोग अपने घर के आसपास की सफाई करने में शर्म महसूस करते हैं। लेकिन, वे गर्व महसूस करते हैं। साफ-सफाई केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। अगर सभी लोग इस पर ध्यान दें तो शहर स्वच्छ और सुंदर हो जाएगा। गंदगी के चलते होने वाली कई बीमारियों से हम बच सकते हैं।

मोहल्ले के अनिल कुमार सिंह व राजीव कुमार कहते हैं कि उनकी वजह से मोहल्ला साफ रहता है। उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। वार्ड पार्षद अजय ओझा कहते हैं कि अशोक सालों से अकेले मोहल्ले की सफाई में लगे हैं। वे शहरवासियों के लिए मिसाल हैं। वे लोगों को अपने काम से आईना दिखा रहे हैं।  

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