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चीनी नागरिक ने मुजफ्फरपुर की जेल में क्यों कर ली आत्महत्या? पता लगाने पहुंची दूतावास की टीम

Chinese Citizen Death in Muzaffarpur बिना वीजा के भारत में प्रवेश के आरोप में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद चीनी नागरिक ली जियाकी की एसकेएमसीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उसने 7 जून को मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा में आत्महत्या का प्रयास किया था। अब इस मामले की जांच करने कोलकाता स्थित चीनी दूतावास की टीम गुरुवार को पहुंची।

By Arun Kumar Jha Edited By: Mohit Tripathi Fri, 14 Jun 2024 08:01 AM (IST)
चीनी नागरिक ने मुजफ्फरपुर की जेल में क्यों कर ली आत्महत्या? पता लगाने पहुंची दूतावास की टीम
चीनी नागरिक लि जियाकी की मौत के संबंध में सिटी एसपी कार्यालय पहुंची चीनी दूतावास के अधिकारी। (जागरण फोटो)

जागरण संवाददाता, मुफ्फरपुर। चीनी नागरिक लि जियाकी की मौत के मामले की जांच करने कोलकाता स्थित चीनी दूतावास की टीम गुरुवार को मुजफ्फरपुर पहुंची। डिप्टी कांसोल जेनरल किन योंग व उप कांसोल लि वेशिलियो की टीम ने पहले नगर पुलिस अधीक्षक अवधेश सरोज दीक्षित से उनके कार्यालय में घटना की पूरी जानकारी ली।

टीम ब्रह्मपुरा थानाध्यक्ष सुभाष मुखिया से मिलकर भी लि जियाकी की गिरफ्तारी के समय की स्थिति के संबंध में जानकारी ली।

दोपहर लगभग दो बजे यह टीम श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल पहुंच कर घायलावस्था में उसके उपचार व शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी ली।

यह टीम यहां लगभग एक घंटे तक रुकी और अधीक्षक प्रकोष्ठ में संबंधित चिकित्सकों से पूछताछ की। इसके बाद शाम में यह टीम शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा भी पहुंची। वहां घटनास्थल का मुआयना किया।

सर्जरी विभाग के चिकित्सक से पूछा- कैसे हुआ उपचार

घायल अवस्था के दौरान लि-जियाकी का आपरेशन करने वाले सर्जरी विभाग के डाक्टर सुशांत से टीम ने पूछा कि उसका जख्म कैसा था? उसका उपचार कैसे हुआ?

डॉ. सुशांत ने टीम को बताया कि गले और अन्य अंगों में खरोंच के निशान थे। उसके प्राइवेट पार्ट में गहरे जख्म था, कुछ भाग बाहर निकला हुआ था। इसका ऑपरेशन किया गया।

लि जियाकी के शव का पोस्टमार्टम करने वाली मेडिकल बोर्ड की टीम में शामिल एफएमटी विभाग के डॉ. कौशल किशोर व विश्वज्योति ने बताया कि पोस्टमार्टम में उसके छाती के बीटी में तरल पदार्थ व दिमाग में सूजन मिला था। शरीर में एक तरह के समानांतर कई कटिंग था।

बिसरा को सुरक्षित रख कर एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है। उसकी हिस्ट्रो पैथोलाजी जांच कराई जा रही है। वहीं एसकेएमसीएच अधीक्षक डॉ. कुमारी विभा ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव को शवगृह में सुरक्षित रखा गया है। टीम में शामिल अधिकारी ने शव को भी देखा।

सहायक जेल आइजी व जेल अधीक्षक ने दी जानकारी

सहायक जेल आइजी राजीव कुमार सिंह व जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता से भी टीम ने पूछताछ की। दोनों ने टीम को बताया कि लि जियाकी को जेल के आठ नंबर वार्ड में रखा गया था। उसी वार्ड के शौचालय में अपने चश्मे को तोड़कर उसके शीशे से अपने को घायल कर लिया था।

उन्होंने आगे बताया कि शौचालय से चश्मा का टूटा भाग व शीशा बरामद किया गया था। उसके नाजुक अंग का कुछ भाग बाहर निकला हुआ था। उसे जेल के अस्पताल में ले जाया गया। वहां से बेहतर उपचार के लिए चिकित्सकों ने श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल भेज दिया। जहां उसका आपरेशन व अन्य उपचार किया गया।

एक्सटर्न चिकित्सक से भी ली जानकारी

उपचार के दौरान लि जियाकी से बातचीत करने वाले चीन से चिकित्सा की पढ़ाई पूरी कर श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के एक्सटर्न से भी टीम ने पूछताछ की।

उन्होंने टीम को बताया कि लि जियाकी ने कहा था कि उसकी जान को खतरा है। उसे लगता है कि कोई उसका पीछा कर रहा है और उसे शूट कर देगा। वह अपने जीवन से खुश नहीं है। वह अपने घर नहीं लौटना चाह रहा है।

लि जियाकी पहले भी आया था नेपाल

यह बात सामने आ रही है कि लि जियाकी इससे पहले इसी साल जनवरी में नेपाल आया था। चीन में वह छोटा-मोटा व्यवसाय करता था। अगर उसे जान को खतरा था और जान बचाने के लिए भारत आना था, तो उसने नेपाल का वीजा क्यों लिया? उसके पास पर्याप्त चीनी करेंसी, नेपाली करेंसी व भारतीय करेंसी मिले थे। उसकी मौत के बाद यह राज दफन ही हो गया कि वास्तव में वह भारत क्यों आया था?

जेल में खुद को कर लिया था जख्मी

ली जियाकी एक जून को नेपाल पहुंचा था। उसके पास नेपाल का वीजा था। नेपाल से वह पांच जून को बस से मुजफ्फरपुर पहुंचा। जहां ब्रह्मपुरा थाने की पुलिस ने उसे लक्ष्मी चौक के निकट से गिरफ्तार कर लिया था।

उसे छह जून को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी भानुप्रताप के कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा भेज दिया गया।

सात जून की शाम उसने शौचालय में चश्मा तोड़कर शीशा से अपने को बुरी तरह घायल कर लिया। उसे जेल के अस्पताल से श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां 11 जून की सुबह उसकी मौत हो गई।

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