सावधान! हर चमकती सब्जी ताजी नहीं, मुजफ्फरपुर में खतरनाक केमिकल से हरी बनाई जा रहीं बासी सब्जियां
मुजफ्फरपुर के बाजारों में बासी सब्जियों को खतरनाक रसायनों से ताजा और चमकदार बनाकर बेचा जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य ...और पढ़ें

सब्जी को चमकाने के लिए हो रहा केमिकल का प्रयोग। फोटो सोशल मीडिया
HighLights
मुजफ्फरपुर में बासी सब्जियों को केमिकल से ताजा बनाया जा रहा।
मैलाकाइट ग्रीन, कॉपर सल्फेट जैसे रसायन स्वास्थ्य के लिए घातक।
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल।
केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। शहर के बाजारों में यदि आप भी हरी, चमकदार और बेहद ताजी नजर आने वाली सब्जियां देखकर उन्हें सेहत के लिए मुफीद समझकर खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाइए।
देखने में आकर्षक लगने वाली ये सब्जियां आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। दरअसल, मुजफ्फरपुर के शहरी बाजारों में खराब और बासी हो चुकी सब्जियों को रसायनों (केमिकल) के जरिए दोबारा ताजा और चमकीला बनाकर बेचने का एक कथित गोरखधंधा सामने आया है।
इस मिलावटखोर खेल से जुड़ी एक तस्वीर इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही है, जिसने शहर के उपभोक्ताओं के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
केमिकलयुक्त घोल में डुबोकर दोबारा जिंदा की जा रही हैं सब्जियां
चर्चाओं और आरोपों के मुताबिक, मुनाफाखोरों द्वारा खराब हो चुकी सब्जियों को एक खास केमिकलयुक्त घोल में डाला जा रहा है। इस रासायनिक प्रक्रिया के बाद बासी सब्जियां भी चंद मिनटों में बिल्कुल ताजी और आकर्षक दिखने लगती हैं।
इसके बाद इन केमिकल युक्त सब्जियों को बाजारों में लाकर आम ग्राहकों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। बाजार की इस कथित कलाबाजी से आम उपभोक्ता पूरी तरह बेखबर है। वह जिस सब्जी को उसकी ताजगी देखकर खरीद रहा है, उसकी वास्तविक स्थिति बेहद दयनीय और जहरीली है।
कैंसर और लिवर-किडनी खराब होने का मंडरा रहा जोखिम
चिकित्सक के अनुसार, सब्जियों को हरा और चमकदार बनाने के लिए आमतौर पर मैलाकाइट ग्रीन और कापर सल्फेट जैसे घातक रसायनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है। मैलाकाइट ग्रीन एक औद्योगिक रंग है, जिसके लगातार सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं, कॉपर सल्फेट की मिलावट से पेट में गंभीर संक्रमण, उल्टी, लिवर और किडनी को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, मुजफ्फरपुर के बाजारों में इस वक्त किस सटीक केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है, इसकी आधिकारिक पुष्टि वैज्ञानिक और प्रयोगशाला जांच के बाद ही संभव हो पाएगी।
कटघरे में फूड सेफ्टी विभाग, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
इंटरनेट मीडिया पर इस तस्वीर के वायरल होने के बाद उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ का बेहद गंभीर मामला है।
इस पूरे कथित सिंडिकेट ने जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली और मॉनिटरिंग व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शहर के मुख्य बाजारों में खुलेआम उपभोक्ताओं की सेहत से इतना बड़ा छलावा कैसे हो रहा है और विभाग की टीम अब तक मूकदर्शक क्यों बनी हुई है?
जांच और सख्त कार्रवाई की उठ रही मांग
इस संवेदनशील मामले के सामने आने के बाद प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन व संबंधित विभाग से बाजारों में तुरंत औचक छापेमारी करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि संदिग्ध सब्जियों के नमूने (सैंपल) एकत्रित कर उन्हें तत्काल प्रयोगशाला भेजा जाए और इस गोरखधंधे में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि खाद्य सुरक्षा नियमों का मजाक उड़ाने वालों को कड़ा सबक मिल सके।
इन आसान तरीकों से करें 'नकली ताजगी' की पहचान
अस्वाभाविक चमक : यदि कोई सब्जी जरूरत से ज्यादा चमकदार या गहरी हरी दिख रही है, तो उस पर संदेह करें। प्राकृतिक सब्जियां हमेशा बिल्कुल परफेक्ट नहीं दिखतीं।
रुई (काटन) टेस्ट: हरी मिर्च, परवल या भिंडी जैसी सब्जियों को घर लाकर थोड़े से गीले काटन से रगड़ें। यदि कॉटन पर हरा रंग उतर आता है, तो समझें कि उस पर प्रतिबंधित केमिकल का लेप लगाया गया है।
पानी का रंग बदलना: सब्जियों को पकाने से पहले कम से कम 15 से 20 मिनट के लिए गुनगुने नमक वाले पानी या सिरके (विनेगर) के पानी में भिगोकर रखें। यदि पानी का रंग बदलने लगे, तो उसका सेवन करने से बचें।
