मुजफ्फरपुर : लॉकडाउन की से इस बार सूर्योपासना के महापर्व छठ का स्वरूप भी बदल गया है। सामूहिक पूजा का यह पर्व इस बार निजी होकर रह गया है। बाजार में भी पर्व की रौनक देखने को नहीं मिल रही। इसके बावजूद व्रतियां सीमित संसाधनों में व्रत कर रही हैं। महापर्व के तीसरे दिन सोमवार की शाम लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य अर्पित कर अपने और परिवार के कल्याण व आरोग्यता की कामना करेंगे। मंगलवार की सुबह उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर यह महानुष्ठान संपन्न होगा। व्रतियां सोमवार को सुबह से ही प्रसाद तैयार करने में जुट जाएंगी। शाम को बांस की टोकरी में अ‌र्घ्य का सूप सजाकर स्वजनों के साथ अपने आंगन या छत पर बने घाट पर जाएंगे। अस्ताचलगामी सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाएगा। इसके पूर्व रविवार को खरना के साथ ही छठी मइया की आराधना शुरू हो गई। महापर्व के दूसरे दिन व्रतियों ने श्रद्धा व भक्ति के साथ सूर्यदेव को गुड़ की खीर और रोटी का भोग लगाया। साथ ही छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को व्रतियों ने खरना किया। दोपहर बाद से ही खरना का प्रसाद तैयार होने लगा था। छठव्रती महिलाएं गीत गाते हुए प्रसाद बना रही थीं। शाम ढलने के बाद श्रद्धा व भक्ति के साथ छठी मइया व सूर्यदेव की पूजा-अर्चना कर खीर व रोटी का भोग लगाया गया। भगवान को नमन कर खुद प्रसाद ग्रहण किया और परिवार के सदस्यों के बीच बांटा गया।

अ‌र्घ्य देने से दूर होते कष्ट

उमेश नगर, जीरोमाइल के नीरज बाबू बताते हैं कि सूर्य षष्ठी व्रत की विशेषता यह है कि इसमें भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य देने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। संध्या व प्रात:काल जल में खड़े होकर अ‌र्घ्य देने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। माता षष्ठी पुत्रहीनों की गोद भरती हैं। सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद माता पूरी करती हैं।

महंगाई के सितम पर भी नहीं रुके कदम

महंगाई अपनी जगह और आस्था अपनी जगह। अमीर हो या गरीब, पूजा में प्रयोग किए जाने वाले फल, दउरा, सुपली, कोशी आदि की खरीद सबको करनी है। ऐसे में महंगाई के सितम के बावजूद भक्तों के कदम नहीं रुके। रविवार को लोगों ने आवश्यकता के अनुसार फलों व पूजन सामग्री के साथ अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी की।

Posted By: Jagran

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