मुजफ्फरपुर, जेएनएन। शहर के चर्चित नवरुणा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआइ के अधिकारी शुक्रवार को नगर थाने पहुंचे। करीब आधा घंटा तक बंद कमरे में केस के रिकॉर्ड को लेकर जानकारी ली। नगर थानाध्यक्ष ओमप्रकाश से घटना की रात से लेकर दूसरे दिन तक की स्टेशन डायरी की प्रति मांगी है। इसे उपलब्ध कराया गया है। करीब सात साल बाद भी इस केस की गुत्थी सुलझ नहीं सकी है। पुलिस व सीआइडी की विफलता के बाद इसकी जांच सीबीआइ को दी गई। जांच-दर-जांच सीबीआइ अधिकारियों ने करीब तीन सौ से अधिक लोगों से पूछताछ की। कई तरह के साक्ष्य जुटाए। लेकिन, नतीजा अभी तक जस का तस है। इससे पीडि़त परिवार को इंसाफ नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अगस्त में तीन महीने की और डेडलाइन तय किए जाने पर जांच में फिर एक बार तेजी आई है।

कहा जा रहा कि सीबीआइ अधिकारी 18 व 19 सितंबर 2012 को नगर थाने की स्टेशन डायरी में क्या अंकित किया ये देखना चाहते हैं। इसको लेकर उसकी प्रति मांगी गई है। संभावना जताई जा रही कि इसे सुप्रीम कोर्ट में भी प्रस्तुत किया जाएगा। हालांकि सीबीआइ अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इधर, सीबीआइ की टीम के आने की जानकारी पर नवरुणा के परिजन घर पर आने का इंतजार करते रहे। लेकिन, वहां कोई नहीं गया। बता दें कि गत माह सीबीआइ ने नवरुणा के परिजन से कुछ जानकारी लेने के लिए कैंप कार्यालय पर बुलाया था। बीमार होने के कारण नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती ने सीबीआइ को अपने घर पर ही बुलाया था।

यह है मामला

18 सितंबर 2012 की रात जवाहरलाल रोड स्थित अतुल्य चक्रवर्ती के घर की खिड़की के राड तोड़कर उनकी बेटी नवरुणा को अगवा कर लिया गया था। करीब ढाई महीने बाद घर के पास नाले से मानव कंकाल मिला था। डीएनए जांच के बाद पुष्टि हुई कि यह नवरुणा का है। इसके बाद करीब डेढ़ साल तक पुलिस व सीआइडी की टीम ने पूरे मामले की जांच की। करीब साढ़े पांच साल से सीबीआइ जांच कर रही है।  

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