मुजफ्फरपुर, जेएनएन। मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में ब्रजेश सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ हत्या की धारा के तहत मुकदमा नहीं चलेगा। सीबीआइ इस संबंध में साक्ष्य जुटाने में विफल रही है। अब इस मामले में हत्या की धारा नहीं जुड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ की इस स्वीकारोक्ति के बाद इस मामले का पटाक्षेप हो गया है। इससे ब्रजेश ठाकुर को बड़ी राहत मिली है। वहीं, सीबीआइ के लिए यह बड़ा झटका है। उधर, इस ताजा मामले में ब्रजेश ठाकुर की पत्‍नी प्रो आशा ठाकुर ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। लेकिन सीबीआई के इस नए बयान के बाद एक ही सवाल गूंज रहा है- 'शेल्‍टर होम के कैंपस में जो हड्डियां मिली थीं, आखिर वह किसकी थीं!' इसके साथ ही और भी कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं, मामले में पुलिस का भी काम बढ़ने वाला है।  

साकेत के विशेष पॉक्सो कोर्ट में इन धाराओं में चला सत्र-विचारण :  

भादवि की धारा -376 सी : (दुष्कर्म कराने का दुस्साहस), 325 : (हत्या करने की नीयत से मारपीट), 354 : (महिला के कपड़े उतारना), 341 : (दुर्व्यवहार व गाली-गलौज)।

पॉक्सो एक्ट की धारा - 4 : (किशोरी के साथ दुष्कर्म), 6 : (12 साल से छोटी बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म, 8 : (लैंगिक हमला), 10 : ( गंभीर लैंगिक हमला), 12: (बच्ची का उत्पीडऩ), 17 : (गलत काम करनेवालों का साथ देना)

ब्रजेश की पत्नी ने प्रतिक्रिया देने से किया इनकार 

मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में सीबीआइ की ओर से आए नए तथ्यों की जानकारी पर मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के परिजनों ने कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। ब्रजेश की पत्नी प्रो. आशा ठाकुर ने कहा कि इस मामले में उसे कुछ नहीं कहना है।

ब्रजेश की संस्था पर 8.32 करोड़ का आयकर बकाया

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन हिंसा मामले के मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर की संस्था सेवा संकल्प व विकास समिति पर आयकर विभाग का 8.32 करोड़ से अधिक बकाया है। वित्तीय वर्ष 2012 से 2018 तक वर्षवार आय व आयकर गणना के लिए विभाग ने नोटिस भेजा है। यही संस्था बालिका गृह का संचालन करती थी। हालांकि, ब्रजेश ठाकुर ने इस संस्था से किसी तरह का संबंध होने से बार-बार इनकार किया है। संस्था को आयकर विभाग से मिली छूट को वापस लिये जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। छह साल की आय व उसके बदले आयकर निर्धारण के बाद विभाग ने उसे नोटिस भेजा है। इसमें टैक्स देने के लिए एक माह की मोहलत दी गई है। इस मोहलत में अगर उसने टैक्स की राशि जमा नहीं की तो उसके बैंक खाता से इसे अटैच कर दिया जाएगा। अगर बैंक में जमा राशि कम हुई तो संस्था की अन्य संपत्ति से इसकी वसूली की जाएगी। आयकर विभाग ने फिलहाल उसके बैंक खाता को औपबंधिक तौर पर अटैच भी कर दिया है। 

दो बार लगा जुर्माना 

आयकर विभाग की ओर से सुनवाई के दौरान ब्रजेश ठाकुर की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। उसकी ओर से कोई कागजात भी पेश नहीं किया गया। विभाग की ओर से दो बार दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन इसके बाद भी कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया। 

संस्था को मिली हुई थी आयकर की धारा 12 एए के तहत छूट 

सेवा संकल्प व विकास समिति को आयकर की धारा 12 एए के तहत आयकर से पूरी तरह छूट मिली हुई थी। बालिका गृह मामला सामने आने पर सरकार ने यह छूट वापस ले ली। इसके बाद आयकर विभाग ने आय व आयकर की गणना की गई। आयकर की जांच में यह बात सामने आई है कि संस्था के माध्यम से आयकर में छूट का लाभ लिया गया। इस संस्था की ओर से कोई काम नहीं किया गया। 

किसकी हैं बरामद हड्डियां 

दरअसल, मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में पहले सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह कहकर हड़कंप मचा दिया कि इस पूरे प्रकरण में बिहार के 25 डीएम और तकरीबन 40 दूसरे पदाधिकारी दोषी हैं। वहीं, अब सीबीआइ ने यह कहकर पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ ला दिया है कि बालिका गृह कांड से गायब हुई 35 लड़कियों में से किसी लड़की की हत्या वहां नहीं हुई थी। ऐसे में पहला सवाल यह है कि आखिर जो हड्डियां बरामद हुईं, वह किस लड़की की थी। सीबीआइ की रिपोर्ट इस बात की भी तस्दीक करती है कि जो हड्डियां मिलीं, वह किसी बालिग की थी।

सीबीआइ ने बढ़ाया पुलिस का काम

सीबीआइ की इस रिपोर्ट ने पुलिस का काम बढ़ा दिया है। अब पुलिस के लिए यह जांच का विषय होगा कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच के दौरान खुदाई में जो हड्डियां बरामद हुई थीं वह किस लड़की की थी। क्या उस लड़की का बालिका गृह से कोई लेना-देना था या फिर उसे यहां लाकर मारा गया। अगर नहीं तो क्या ऐसी स्थिति में उसकी कहीं और हत्या करते हुए उसके शव को दफनाने के लिए इस स्थान का उपयोग किया गया। अगर ऐसा किया गया तो इसकी असल वजह क्या है। घटना के इतने दिनों के बाद जब सीबीआइ तक इस मामले में अपनी जांच कर चुकी है ऐसे में नए सिरे से पुलिस को जांच में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। सीबीआइ के इनकार के बाद पुलिस महकमे को नए सिरे से पूरे प्रकरण की एक-एक कड़ी को जोडऩा होगा। यदि उसे आवश्यकता महसूस होगी तो वह बरामद हड्डियों की डीएनए जांच के लिए भी आवेदन कर सकती है।

 

Posted By: Rajesh Thakur

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