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मुजफ्फरपुर में जेल का गेट खुला तो छलक पड़े आंसू, अब मशरूम और अगरबत्ती से संवारेंगे जिंदगी

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:05 PM (IST)

गांधी जयंती पर मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा से तीन बुजुर्ग कैदियों को विशेष परिहार के तहत रिहा किया गया। जेल में ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर में तीन बंदियों को विशेष परिहार के आधार पर मिली रिहाई।

मुजफ्फरपुर में तीन बंदियों को विशेष परिहार के आधार पर मिली रिहाई।

HighLights

  1. गांधी जयंती पर मुजफ्फरपुर जेल से तीन बुजुर्ग कैदी रिहा हुए।

  2. इन्हें मशरूम व अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण जेल में मिला था।

  3. रिहाई के बाद सरकारी योजनाओं से पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।

अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। गांधी जयंती पर शुक्रवार को अमर बलिदानी खुदीराम बोस केंद्रीय कारा से तीन बुजुर्ग बंदियों को रिहा किया गया। सजा की निर्धारित अवधि लगभग पूरी होने के बाद विशेष परिहार के आधार पर इन्हें रिहाई मिली।

इनमें समस्तीपुर के वारिसनगर थाने के धनहर निवासी 71 वर्षीय रामजी शाह, दरभंगा के बेनीपुर निवासी 70 वर्षीय सुरेंद्र मंडल व मुजफ्फरपुर के कुढ़नी निवासी राजेश्वर सहनी शामिल है।

जेल का गेट खुलते ही वर्षों से इंतजार कर रहे स्वजन की आंखें भी नम हो गईं। किसी को लेने पोते-पोती पहुंचे थे तो किसी के बेटे बाहर खड़े थे। केंद्रीय कारा अधीक्षक यूसूफ रिजवान ने तीनों को माला पहनाकर सम्मानित किया और विदाई दी।

बताया कि जेल में बंदियों को मशरूम उत्पादन व अगरबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्होंने कारा में पहरा ड्यूटी भी की। प्रशिक्षण से बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद स्वरोजगार से जुड़ने के लिए तैयार किया गया।

कारा में मशरूम उत्पादन व अगरबत्ती निर्माण से बंदियों को एक वर्ष में करीब 70 हजार रुपये तक की कमाई भी हुई। समस्तीपुर के रामजी शाह को जमीन विवाद में हुई मारपीट के मामले में पांच वर्ष की सजा व 10 हजार रुपये जुर्माना हुआ था।

वह चार वर्ष चार माह 15 दिन जेल में रहे। रामजी को लेने उनके पोते-पोती पहुंचे थे। उन्होंने रिहाई के लिए बिहार सरकार के प्रति आभार जताया। दरभंगा के सुरेंद्र मंडल करीब 16 वर्ष से जेल में थे।

जमीन विवाद में मारपीट के मामले में उनका नाम आया था। कई वर्ष जेल में रहने के बाद बेल पर बाहर आए, लेकिन दोबारा गिरफ्तारी के बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

गांधी जयंती पर रिहाई को उन्होंने खुशी का दिन बताया। वहीं, कुढ़नी के राजेश्वर सहनी वर्ष 2011 से जेल में थे। उनका मामला वर्ष 1980 के भूमि विवाद से जुड़े हत्या के मामले से संबंधित था। बताया कि अब इतने वर्षों बाद बाल-बच्चों से मिल सकेंगे।

उपनिदेशक कारा प्रोवेशन पूनम रानी ने कहा बंदियों की रिहाई के साथ उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था की जाएगी। अधिकारी उनके घर जाकर सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करेंगे ताकि उन्हें आगे किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। मौके पर प्रोवेशन पदाधिकारी सुल्ताना फिरदौस व रुचिला रानी और कारा के पदाधिकारी थे।

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