बिहार में अब अपनी बोली में पढ़ेंगे बच्चे, पहली-दूसरी कक्षा से शुरू होगी छह क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई
Bhojpuri education : बच्चों को उनकी मातृभाषा और क्षेत्रीय बोली में शिक्षा देने के लिए बिहार के सरकारी स्कूलों में ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
बिहार में क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई की नई पहल।
कक्षा एक-दो के लिए छह भाषाओं में किताबें बनेंगी।
मुजफ्फरपुर की शिक्षिका बज्जिका पाठ्यपुस्तक बनाएंगी।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बच्चे जब अपनी बोली में पढ़ते हैं तो शब्दों से जुड़ना और उनका अर्थ समझना आसान हो जाता है। इसी सोच के साथ बिहार के सरकारी स्कूलों में शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को उनकी मातृभाषा और क्षेत्रीय बोली के माध्यम से शिक्षा देने की पहल की जा रही है।
अब कक्षा एक और दो के बच्चे भोजपुरी, मगही, सुरजापुरी, बज्जिका, मैथिली और अंगिका में तैयार पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई करेंगे। इसके लिए पाठ्यक्रम की रूपरेखा बनाने के साथ किताबें तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
छह क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार होंगी किताबें
राज्य शिक्षा शोध परिषद की ओर से छह क्षेत्रीय भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। इसमें कुल 25 शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भोजपुरी और मगही के लिए पांच-पांच, सुरजापुरी के लिए दो, बज्जिका के लिए पांच, मैथिली के लिए चार और अंगिका के लिए चार शिक्षक पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री तैयार करेंगे।
मुजफ्फरपुर की शिक्षिका को मिली जिम्मेदारी
इस पहल में जिले के मोतीपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पहाड़चक की शिक्षिका ज्योत्सना वर्द्धन भी शामिल हैं। उन्हें बज्जिका भाषा की पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए चयनित किया गया है। इससे क्षेत्रीय भाषा में बच्चों के लिए शिक्षण सामग्री विकसित करने के काम में जिले की भागीदारी भी सुनिश्चित हुई है।
पढ़ाई में आसानी, भाषा से बढ़ेगा जुड़ाव
शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को परिचित भाषा में पढ़ाने से विषयों को समझने में आसानी हो सकती है। कई बच्चे घर में क्षेत्रीय बोली बोलते हैं, जबकि स्कूल में दूसरी भाषा में पढ़ाई करते हैं। ऐसे में अपनी बोली में तैयार किताबें उनके लिए सीखने की प्रक्रिया को सहज बना सकती हैं।
पहले चरण में पहली और दूसरी कक्षा पर जोर
फिलहाल कक्षा एक और दो के लिए पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को उनकी भाषाई पृष्ठभूमि के अनुरूप शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना और शुरुआती शिक्षा को अधिक सहज बनाना है।
