बिहार में युवाओं के रोजगार पर संकट, विधान परिषद के बाद 3818 आईसीटी इंस्ट्रक्टर की नौकरी पर खतरा
Bihar Employment Crisis: केंद्र सरकार से बजट स्वीकृति न मिलने के कारण बिहार के 3818 सरकारी स्कूलों में कार्यरत आईसीटी ...और पढ़ें

आईसीटी इंस्ट्रक्टर से तत्काल प्रभाव से काम लेना बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है।
HighLights
केंद्र से बजट न मिलने पर आईसीटी इंस्ट्रक्टर की सेवाएं समाप्त।
बिहार के 3818 सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पर असर।
विधान परिषद में 125 से अधिक अभ्यर्थियों की नौकरी अधर में।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar School Computer Teacher: एक ओर जहां युवाओं को रोज़गार के नए अवसर देने और नौकरियां बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर रोजगार हासिल कर चुके युवाओं के अचानक जॉबलेस होने की खबरें परेशान कर रही हैं।
बिहार विधान परिषद में भर्ती प्रक्रिया की अनियमितताओं के बीच अब राज्य के शिक्षा विभाग से युवाओं के लिए बुरी खबर आई है।
केंद्र सरकार से बजट की स्वीकृति न मिलने के कारण सूबे के 3818 सरकारी स्कूलों में कार्यरत आईसीटी इंस्ट्रक्टर से तत्काल प्रभाव से काम लेना बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है।
केंद्र से बजट अटका
वित्तीय वर्ष 2026-27 में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आवर्ती मद में राशि की स्वीकृति नहीं दी गई है। बजट में कटौती और स्वीकृति न मिलने के कारण बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने मेसर्स आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड को पत्र लिखकर आईसीटी इंस्ट्रक्टर की सेवाएं तुरंत रोकने का निर्देश दिया है।
राज्य परियोजना निदेशक ने स्पष्ट किया है कि यदि इसके बावजूद एजेंसी काम लेती है, तो मानदेय का संपूर्ण भुगतान एजेंसी को ही करना होगा।
डिजिटल शिक्षा पर असर
साल 2025-26 में राज्य के 3818 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल साक्षरता से जोड़ने के उद्देश्य से आईसीटी लैब स्थापित किए गए थे।
इन लैब्स के संचालन के लिए इंस्ट्रक्टर नियुक्त किए गए थे जो बच्चों को कंप्यूटर और डिजिटल गतिविधियों का प्रशिक्षण दे रहे थे।
अब इंस्ट्रक्टर हटने से सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा का ढांचा पूरी तरह लड़खड़ा जाएगा और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होगी।
विधान परिषद में संकट
दूसरी तरफ बिहार विधान परिषद सचिवालय में विभिन्न पदों पर चयनित 125 से अधिक अभ्यर्थियों की नौकरी पर भी तलवार लटक गई है।
धांधली और अनियमितता के आरोपों के कारण नव-चयनित कर्मियों के योगदान पर रोक लगा दी गई है। टाइपिंग और शॉर्टहैंड में असमर्थ पाए जाने तथा ब्लैकलिस्टेड एजेंसी द्वारा परीक्षा आयोजित कराए जाने के मामलों ने युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया है, जिससे आक्रोशित अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।