यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kudhni Assembly By-election: महागठबंधन से किनारे हुए नेताओं के 'खेवनहार' बनेंगे वीआइपी सुप्रीमो मुकेश सहनी!
Kudhni Assembly By-election 2022 कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी दोनों प्रमुख दल ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर [अमरेन्द्र तिवारी]। कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आज दूसरा दिन है। बावजूद इसके अभी तक दोनों प्रमुख दावेदारों की ओर से प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं की गई है। इस बीच वीआइपी सुप्रीमो मुकेश सहनी की ओर से मैदान में उतरने की घोषणा कर दी गई है। इससे दोनों गठबंधनों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। अभी तक की स्थिति देखने के बाद जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार महागठबंधन में दावेदारों की संख्या बहुत अधिक है। जाहिर बात है कि सबको मौका नहीं मिलने जा रहा है। ऐसे में जिन्हें वहां से निराशा हाथ लगेगी, माना जा रहा है कि मुकेश सहनी उन पर अपना दांव लगा सकते हैं। बोचहां विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। राजनीति के जानकारों को भी इस बात का इंतजार है कि महागठबंधन की ओर से किसे मौका दिया जा रहा है। उससे भी अधिक इस बात का इंतजार है कि मुकेश सहनी किस पर दांव लगाते हैं?

सीएम के पाला बदलने से बदली स्थिति
अब तक छोटी बड़ी पार्टियों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अंदर ही अंदर यह तैयारी चल रही है कि अगर महागठबंधन में जिसको टिकट नहीं मिला तो वे मुकेश सहनी की पार्टी यानी वीआइपी की नाव पर सवार होकर चुनावी वैतरणी पार करना चाहेंगे। सबसे ज्यादा मारामारी महागठबंधन में ही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना पाला बदल लिया है। इस वजह से जनता दल यूनाइटेट का राष्ट्रीय जनता दल से गठबंधन है। पिछले विधानसभा चुनाव में जदयू व भाजपा एक मंच पर थे। उसके आधार पर यहां पर यह सीट भाजपा के पास रहने के कारण जदयू के दावेदार व कार्यकर्ता भाजपा के साथ थे। उनको यह पता था कि इस सीट पर भाजपा ही लडे़गी, लेकिन बदली राजनीतिक स्थिति में अब राजद के बाद यहां पर जदयू से अंदर से ही दावेदारी पेश की जा रही है। महागठबंधन की ओर से एक ही प्रत्याशी को मौका मिलेगा। ऐसे में अन्य दावेदारों में से कोई एक वीआइपी यानी विकासशील इंसान पार्टी के पास जा सकता है। यह दोनों के लिए बेहतर साबित होगा।
बोचहां में भी कुछ ऐसा ही दिखा था
बोचहां विधानसभा उपचुनाव में राजद के टिकट के मजबूत दावेदार पूर्व मंत्री रमई राम को जब अचानक टिकट नहीं मिला तो उन्होंने रातोंरात पाला बदला। सीधे वीआइपी सुप्रीमो मुकेश सहनी के पास आए और उनकी बेटी को टिकट मिला। दुर्भाग्य से उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। बोचहां सीट पर वीआइपी पार्टी छोडकर राजद में शामिल हुए पूर्व विधायक मुसाफिर पासवान के पुत्र अमर पासवान ने यहां से राजद के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी। अब कुढनी के बागियोें की नजर वीआइपी पर है।
राजद-जदयू के सहनी समाज से दावेदारी
राजद से सहनी समाज से आने वाले डा.अनिल सहनी चुनाव जीते थे। इस लिहाज से राजद व जदयू में सहनी समाज के लोग दावेदारी कर रहे हैं। राजद से जहां विधायक रहे डा.अनिल सहनी के परिवार से उनकी पत्नी का नाम अंदर ही अंदर सामने आ रहा है। वहीं राजद के पुराने कार्यकर्ता शेखर सहनी क्षेत्र से लेकर पटना तक सक्रिय हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के संपर्क में हैं। इसके साथ जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष रंजीत सहनी भी तैयारी मेें हैं। रंजीत सहनी जदयू कोटा के मंत्री मदन सहनी के काफी करीब हैं। इसके साथ वे जिले मेें सक्रिय निषाद समाज के गैर राजनीतिक संगठन निषाद संघर्ष मोर्चा से जुडे हुए हैं। इससे इतर जिस तरह से गोपालगंज उपचुनाव में वैश्य विरादरी को राजद ने टिकट देकर चौंका दिया था। उस तरह कुछ यहां पर नया राजनीतिक समीकरण सामने आए तो कुछ कहा नहीं जा सकता। राजनीति के जानकारों की मानें तो राजद ने जिले की कमान अपने परंपरागत जातीय गणित से यानी मुस्लिम -यादव से अलग वैश्य विरादरी से आने वाले रमेश गुप्ता को दिया है। राजद से आने वाले रामपरीक्षण साहू भी कुढ़नी से चुनाव जीत चुके हैं।
कुढनी विधानसभा का जातीय गणित
कुढ़नी उपचुनाव में जातीय गुणा गणित का प्रभाव भी चुनाव में दिखता है। यहां पर अतिपिछडा समाज के अनुमानित मतदाताा 73 हजार है। इसमें मल्लाह जाति को हटाकर देंखे तो यह संख्या करीब 43 हजार हो जाती है।
जाति-------अनुमानित मतदाता
- वैश्य-37 हजार
- मुस्लिम-34 हजार
- यादव-35 हजार
- भूमिहार-30 हजार
- मल्लाह-30 हजार
- कुशवाहा-20 हजार
- कुर्मी-10 हजार
- राजपूत-10 हजार पांच सौ
- ब्राह्मण- नौ हजार
- अनुसूचित जाति- 54 हजार
- अन्य पिछड़ी जाति-42 हजार 228
- कुल संख्या - तीन लाख 11 हजार 728
नोट : यह सरकारी आंकड़ा नहीं है।