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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Kudhni By-election: वोटकटवा के प्रदर्शन से तय होगा कुढ़नी विधानसभा सीट का परिणाम...समझें पूरा गणित

By Prem Shankar MishraEdited By: Ajit kumar
Published: Mon, 21 Nov 2022 10:51 AM (IST)

Bihar Politics दोनों प्रमुख प्रत्याशी समर्थकों से अधिक विरोधी के कटने वाले वोटों का जोड़-घटाव कर रहे हैं। 2010 और ...और पढ़ें

पिछले चुनाव में महज 712 वोटों से भाजपा उम्मीदवार की हार हुई थी। फाइल फोटो
पिछले चुनाव में महज 712 वोटों से भाजपा उम्मीदवार की हार हुई थी। फाइल फोटो

मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। Bihar Politics: किसी भी चुनाव में उम्मीदवारों की नजर अपने वोटरों पर रहती है। वे आकलन करते हैं कि उन्हें इतने वोट मिल जाने पर जीत तय हो जाएगी। मगर कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में स्थिति थोड़ी अलग रहती है। यहां उम्मीदवार जोड़-घटाव करते हैं कि विरोधी के कितने वोट कट रहे। इसके आधार पर ही जीत और हार तय मानी जाती है। पिछले चुनाव में महज 712 वोटों से भाजपा उम्मीदवार केदार गुप्ता की हार का यही कारण रहा। जदयू के साथ रहते हुए भी रालोसपा के राम बाबू सिंह ने 10 हजार से अधिक वोट काट लिए। इनमें अधिकतर वोट जदयू के परंपरागत कुशवाहा के थे, जो भाजपा उम्मीदवार को नहीं मिले। वर्ष 2015 के चुनाव को छोड़ दें तो 2010 की कहानी भी कमोबेश यही थी। तब कांग्रेस उम्मीदवार शाह आलम शब्बू ने 12 हजार से अधिक वोट काटकर मनोज कुशवाहा की महज डेढ़ हजार वोटों से जीत तय कर दी थी। एनडीए उम्मीदवार के विरोधी लोजपा प्रत्याशी विजेंद्र चौधरी को मिलने वाले वोट शाह आलम की तरफ चले गए।

कहानी दोहराने को तैयार हो रही जमीन

इस उपचुनाव में भी यह कहानी दोहराने की जमीन तैयार हो रही है। जिस तरह से वोटों की मोर्चाबंदी हो रही है, उससे कड़े मुकाबले की संभावना है। एक ओर वीआइपी ने नीलाभ कुमार को उतार कर भाजपा के वोटबैंक में सेंधमारी की तैयारी की है। दूसरी ओर एआइएमआइएम उम्मीदवार मो. गुलाम मुर्तुजा का निशाना जदयू उम्मीदवार का वोटबैंक है। ये दोनों उम्मीदवार जितने अधिक वोट पाएंगे भाजपा और जदयू प्रत्याशियों की परेशानी उतनी ही बढ़ेगी। वोटरों की संख्या की बात करें तो यहां वैश्य, मुस्लिम और यादव की संख्या करीब-करीब एक जैसी है। यह 35 से 37 हजार तक है। इसके अलावा भूमिहार और सहनी वोटर 30-30 हजार हैं।

राजद के माय समीकरण पर भरोसा

कुर्मी और कुशवाहा को मिला दें तो उसके मतदाता की संख्या भी इतनी ही हो जाएगी। सबसे अधिक वोटर अनुसूचित जाति के हैं। इसकी संख्या करीब 50 हजार है। चुनाव की सारी रणनीति इन्हीं वोटरों पर बनाई जा रही है। जदयू कुशवाहा के साथ राजद के माय समीकरण पर भरोसा कर रहा। इसमें दो तरफा सेंधमारी की रणनीति बनाई जा रही। कुशवाहा वोट में सेंधमारी के लिए भाजपा ने विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी को चुनाव की कमान सौंपी है। वहीं एआइएमआइएम का निशाना ही अल्पसंख्यक वोटर हैं। ऐसे में राजद नेताओं से जदयू को उम्मीद होगी कि वे अधिक से अधिक यादव वोट उनकी ओर दिलाएं।

वैश्य वोटर को आधार मान रही भाजपा

भाजपा उम्मीदवार स्वजातीय वैश्य वोटर को आधार वोट मान रहे। भूमिहार और अनुसूचित जाति का वोट उनके लिए महत्वपूर्ण होगा। लोजपा के दोनों गुट के समर्थन का भाजपा को लाभ मिल सकता है। रणनीति भूमिहार वोटरों को लेकर है। भाजपा और महागठबंधन ने अपने-अपने भूमिहार नेताओं को मैदान में उतार दिया है। मंत्री विजय चौधरी के साथ कई नेता लोगों से मिल रहे। वहीं, भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा, डा. सीपी ठाकुर के पुत्र व राज्यसभा सदस्य विवेक ठाकुर आदि को लगाया गया है। पूर्व विधायक साधु शरण शाही के परनाती होने का लाभ वीआइपी उम्मीदवार नीलाभ को मिल सकता है। उनका मिलने वाला वोट निर्णायक हो सकता है।

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