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भाजपा नेता सुरेश शर्मा समेत 6 के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी, धोखाधड़ी-मनी लॉन्ड्रिंग और रंगदारी का आरोप

राधा देवी जागेश्वरी मेमोरियल (आरडीजेएम) मेडिकल कालेज एंड अस्पताल पर बलपूर्वक कब्जा करने के मामले में भाजपा नेता व पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा और उनके बेटे राजीव कुमार समेत छह लोगों पर दायर मामले में पटना जिला कोर्ट ने संज्ञान लिया है।

By Jagran NewsEdited By: Deepti MishraPublished: Mon, 27 Mar 2023 12:30 PM (IST)Updated: Mon, 27 Mar 2023 12:30 PM (IST)
भाजपा नेता सुरेश शर्मा और उनके पुत्र के खिलाफ पटना के कोर्ट ने लिया संज्ञान।

 जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर: तुर्की स्थित राधा देवी जागेश्वरी मेमोरियल (आरडीजेएम) मेडिकल कालेज एंड अस्पताल पर बलपूर्वक कब्जा करने के मामले में भाजपा नेता व पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा और उनके बेटे राजीव कुमार समेत छह लोगों पर दायर मामले में पटना जिला कोर्ट ने संज्ञान लिया है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।

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जनहित मंच के प्रधान कार्यालय में वरीय अधिवक्ता नवल किशोर प्रसाद सिन्हा ने रविवार को प्रेस वार्ता कर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद भी सरेंडर नहीं करने पर कोर्ट ने गैर-जमानतीय वारंट जारी किया है। इसके कार्यान्वयन के लिए एसएसपी को आदेश भेजा गया है। पटना कोर्ट ने पहले 22 मार्च तक अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिस पर आरोपी नेता अदालत में पेश नहीं हुए।

पूर्व मंत्री बोले- उन पर गलत केस किया गया

इस मामले में पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि आरडीजेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वह निदेशक हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने भी उनके दावे को सही पाया है। सभी जगहों से दावा खारिज होने के बाद उन पर गलत केस किया गया है।

अधिवक्ता ने कहा कि पूर्व मंत्री और उनके बेटे समेत अन्य लोगों ने बलपूर्वक व असंवैधानिक तरीके आरडीजेएम मेडिकल कॉलेज को नियंत्रण में लेने की कोशिश की। इसे लेकर जागेश्वरी मेमोरियल इंस्टिट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग की अध्यक्ष मनीषा कुमारी ने एसडीजेएम पटना के कोर्ट में नालिसी दायर की थी।

मनीषा ने अपनी नालिसी में उक्त मेडिकल कॉलेज को लेकर अवैध पत्राचार करने, भ्रम फैलाने, मनी लॉन्ड्रिंग और ब्लैकमेल करने के भी आरोप लगाए। कहा कि मेडिकल कॉलेज के नाम पर करोड़ों रुपये के डोनेशन को शेल कंपनियों में लगाया गया। ये कंपनियां उनके संबंधी और दोस्तों के नाम पर हैं। प्रस्तुत साक्ष्य को मुकदमा चलाए जाने के लिए पर्याप्त आधार पाते हुए कोर्ट ने संज्ञान ले लिया। 


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