यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 13, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kudhni By-election: भाजपा की ओर से कौन होगा चुनाव मैदान में...अब हर किसी की नजर इसी बात पर टिकी
Bihar Politics आम मतदाताओं के साथ ही साथ वीआइपी व एआइएमआइएम जैसे छोटे दलों की भी पैनी नजर है। दोनों ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर, जागरण संवाददाता। इस वर्ष जिले में विधानसभा का दूसरा उपचुनाव होने जा रहा है। बोचहां के बाद कुढ़नी उपचुनाव का परिणाम राज्य के अगले विधानसभा चुनाव की रूपरेखा तय करने वाला हो सकता है। इसलिए सभी दल सधे कदमों से चाल चल रहे हैं। महागठबंधन की ओर से उम्मीदवारी तय कर दी गई है। राजद ने सीटिंग सीट जदयू को दे दी। जदयू ने तनिक भी देरी नहीं कर पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा को उम्मीदवार घोषित कर दिया। अब मतदाताओं के साथ छोटे दलों की नजर भाजपा के कदम की ओर है। खासकर वीआइपी के मुकेश सहनी और आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमएइएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की।
केदार गुप्ता की खूब हो रही चर्चा
माना जा रहा है कि भाजपा यहां से लगातार दो चुनाव लड़ चुके केदार गुप्ता को ही आजमाएगी। ऐसा इसलिए भी कि उन्होंने वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद, जदयू और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार मनोज कुशवाहा को करीब 12 हजार वोटों से हराया था। पिछले चुनाव में वह महज 712 वोटों से पराजित हुए थे।एक बार तो मतगणना के दौरान उन्हें विजयी भी घोषित कर दिया गया था। राजद उम्मीदवार अनिल सहनी की आपत्ति के बाद दो ईवीएम के वोटों की गिनती में केदार पिछड़ गए। इस नाम के बाद ही भाजपा किसी अन्य वैश्य या भूमिहार उम्मीदवार पर विचार कर सकती है। प्रदेश स्तर के एक नेता की मानें तो नाम करीब-करीब तय हो गया है। हिमाचल चुनाव को लेकर घोषणा नहीं हुई थी। एक-दो दिन में इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
मुकेश सहनी भाजपा का खेल बिगाड़ेंगे
माना जा रहा कि भाजपा की इस घोषणा के बाद ही मुकेश सहनी अपना पत्ता खोलेंगे। भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए वीआइपी से किसी भूमिहार को टिकट दे सकते हैं। ऐसे में भाजपा के वोट में सेंधमारी तय है। बोचहां में कुछ ऐसा ही हुआ था। रमई राम की पुत्री डा. गीता के रूप में उम्मीदवारी से मुकाबला त्रिकोणीय हुआ था। दूसरी ओर ओवैसी की पार्टी ने भी उम्मीदवार देने की घोषणा कर दी है। अभी नाम तय होना बाकी है। अगर कोई कद्दावर नाम पार्टी ने तय किया तो नुकसान महागठबंधन को हो सकता है। वर्ष 2010 के चुनाव के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर लड़े शाह आलम शब्बू ने 12 हजार वोट काटे थे। इससे एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार मनोज कुशवाहा की महज डेढ़ हजार वोट से जीत हुई थी। कुछ इसी तरह के चेहरे की तलाश में ओवैसी की पार्टी है।