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मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: बड़ी लापरवाही उजागर, ICU में क्षमता से अधिक मरीज थे भर्ती

Published: Thu, 04 Jun 2026 12:13 PM (IST)

Bihar Fire Incident: मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए अग्निकांड की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई है। आईसीयू में ...और पढ़ें

HighLights

  1. आईसीयू में क्षमता से अधिक 15 मरीज भर्ती थे।

  2. प्रशासन ने आग लगने के कारणों की जांच समिति बनाई।

  3. मृतकों के आश्रितों को चार लाख रुपये मुआवजा मिलेगा।

डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Hospital Fire: शहर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जांच में अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आने लगी है।

जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि अस्पताल के आईसीयू में 13 मरीजों के इलाज की क्षमता थी, लेकिन वहां 15 बेड लगाए गए थे। आग लगने की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

डीएम व एसएसपी ने किया निरीक्षण

डीएम सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि उन्होंने स्वयं एसएसपी के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया है। प्रारंभिक जांच में आईसीयू में 13 मरीजों के भर्ती होने का रिकॉर्ड मिला है।

हालांकि अस्पताल का कंप्यूटर सिस्टम आग में जल जाने के कारण मरीजों से संबंधित कई जानकारियां प्रभावित हुई हैं। आईसीयू के प्रभारी भी हादसे में घायल हुए हैं और उनका इलाज दूसरे अस्पताल में चल रहा है।

परिजनों से जुटाई जा रही जानकारी

प्रशासन की टीम अस्पताल पहुंच रहे मरीजों के परिजनों से जानकारी एकत्र कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के रिकॉर्ड प्रभावित होने के कारण मरीजों की पहचान और स्थिति का सत्यापन परिजनों के सहयोग से किया जा रहा है।

ऑक्सीजन सप्लाई और इलेक्ट्रिक कनेक्शन पर संदेह

घटना के कारणों को लेकर डीएम ने बताया कि प्रथम दृष्टया आग लगने का संबंध ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम और कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़े इलेक्ट्रिकल कनेक्शन से हो सकता है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

पांच सदस्यीय जांच समिति गठित

जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। एडीएम आपदा प्रबंधन के नेतृत्व में गठित यह समिति आग लगने के कारणों, अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी और सुरक्षा मानकों के पालन की जांच करेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्वजनों ने सुनाई दर्दनाक आपबीती

घटना के बाद अस्पताल पहुंचे मरीजों के स्वजनों ने बताया कि यदि सीढ़ी का दरवाजा बंद नहीं रहता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उनका आरोप है कि आग लगने के दौरान बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते उपलब्ध नहीं थे, जिससे हालात और गंभीर हो गए।

मृतकों के आश्रितों को मुआवजा

डीएम ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के आश्रित को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी जाएगी। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटा है।

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