Bihar Teachers Salary : भागलपुर में वेतन घोटाले के बाद शिक्षा विभाग सख्त, मुजफ्फरपुर में शिक्षकों के डाटा की जांच शुरू
Muzaffarpur Education Department : भागलपुर वेतन घोटाले के बाद मुजफ्फरपुर में शिक्षकों के वेतन डेटा की पड़ताल शुरू हुई है, ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
भागलपुर वेतन घोटाले के बाद मुजफ्फरपुर में सतर्कता।
शिक्षकों के वेतन डेटा की जमीनी पड़ताल शुरू।
कुढ़नी छोड़कर अन्य प्रखंडों से रिपोर्ट में देरी।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। भागलपुर में वेतन घोटाले का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग अब शिक्षकों के वेतन भुगतान से जुड़े डाटा को लेकर सतर्क हो गया है।
मुजफ्फरपुर में भी सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के रिकॉर्ड की जमीनी स्तर पर पड़ताल शुरू की गई है। मकसद साफ है-शिक्षकों की संख्या, कोटि और वर्ग से जुड़े आंकड़ों को दुरुस्त कर वेतन भुगतान में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को रोकना।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण काम में प्रखंड स्तर पर सुस्ती सामने आई है। कुढ़नी को छोड़कर अब तक किसी भी प्रखंड से डीपीओ स्थापना कार्यालय को अपेक्षित रिपोर्ट नहीं मिली है। इससे विभाग की नाराजगी बढ़ गई है।
वेतन भुगतान के डाटा की होगी पड़ताल
शिक्षकों के वेतन भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड को प्रमाणिक बनाने के लिए विद्यालयवार, कोटिवार और वर्गवार मास्टर डाटा तैयार कराया जा रहा है। इसके आधार पर शिक्षकों के एचआरएमएस और सीएफएमएस मैपिंग को अपडेट किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य सेवा संबंधी आंकड़ों में विसंगतियों को दूर करना और वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।
कुढ़नी को छोड़ बाकी प्रखंड पीछे
मास्टर डाटा तैयार करने के लिए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और प्रखंड लेखापाल-सह-डाटा इंट्री ऑपरेटरों को निर्धारित प्रपत्र में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद कुढ़नी को छोड़कर किसी अन्य प्रखंड से अपेक्षित रिपोर्ट नहीं मिली है। निर्धारित समय सीमा में जानकारी नहीं मिलने पर स्थापना कार्यालय ने नाराजगी जताई है।
छुट्टी में भी नहीं आई तेजी
दुर्गापूजा अवकाश के दौरान कार्यालय खोले जाने के बाद भी डाटा तैयार करने के काम में अपेक्षित तेजी नहीं आई। लेखापाल-सह-डाटा इंट्री ऑपरेटरों को काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया था। मोबाइल पर संपर्क करने के बावजूद शाम तक कार्य में खास प्रगति नहीं होने पर विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है।
लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना प्रहलाद कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रमाणिक मास्टर डाटा उपलब्ध कराना अनिवार्य है। समय पर रिपोर्ट नहीं देने वाले संबंधित लेखापाल-सह-डाटा इंट्री ऑपरेटरों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
गड़बड़ी रोकने पर विभाग का जोर
जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविंद सिन्हा ने बताया कि एचआरएमएस-सीएफएमएस मैपिंग से जुड़े डाटा को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि शिक्षकों के वेतन भुगतान में किसी तरह की अनियमितता की आशंका को रोका जा सके। भागलपुर की घटना के बाद डाटा की प्रमाणिकता और निगरानी को लेकर विभाग की सतर्कता बढ़ गई है।
