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दो का दम: बेगूसराय की आंचल ने दूसरे प्रयास में क्रैक किया NEET UG 2026, SKMCH से बनेंगी डॉक्टर

By Keshav KumarEdited By: Ajit kumar
Published: Sat, 17 Oct 2026 03:39 PM (IST)

Aanchal Anurag Neet Success: बेगूसराय की आंचल अनुराग ने दूसरे प्रयास में नीट यूजी परीक्षा पास कर एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में ...और पढ़ें

आंचल का चिकित्सक बनकर समाज सेवा करने का सपना धरातल पर उतरने लगा है।

आंचल का चिकित्सक बनकर समाज सेवा करने का सपना धरातल पर उतरने लगा है।

HighLights

  1. बेगूसराय की आंचल ने दूसरे प्रयास में नीट यूजी क्रैक किया।

  2. मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में मिला दाखिला, डॉक्टर बनेंगी।

  3. सीमित संसाधनों के बावजूद लगन और मेहनत से सपना साकार।

केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। Neet Ug Result Begusarai: मन में कुछ कर गुजरने का सच्चा जज्बा हो और हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुकाम हासिल करना नामुमकिन नहीं रह जाता।

गरीबी, संसाधनों की कमी या असफलता की शुरुआती चुनौतियां भी उस वक्त घुटने टेक देती हैं जब लगन सच्ची हो। इस कहावत को बेगूसराय जिले के गाछी टोला (वार्ड संख्या 30) की रहने वाली मेधावी बेटी आंचल अनुराग ने पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने दो का दम (निरंतर अध्ययन और सही मार्गदर्शन) दिखाया है। 

आंचल ने अपने दूसरे प्रयास में देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट यूजी' (NEET UG) में शानदार सफलता हासिल की है। इस सफलता से न केवल उनके परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है, बल्कि पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है।

एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में मिला दाखिला

राज्य कोटे (State Quota) के तहत आंचल का नामांकन मुजफ्फरपुर के प्रतिष्ठित श्री कृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (SKMCH) में हो गया है।

इसके साथ ही अब उनके चिकित्सक बनकर समाज सेवा करने का सपना धरातल पर उतरने लगा है। आंचल के पिता संजय कुमार पेशे से एक शिक्षक हैं, जबकि उनकी माता एक कुशल गृहणी हैं।

चार भाई-बहनों (दो भाई और दो बहन) में आंचल सबसे बड़ी हैं। बड़ी बहन होने के नाते उन पर न केवल अपनी पढ़ाई का दबाव था, बल्कि छोटे भाई-बहनों के लिए एक मिसाल बनने और पारिवारिक उम्मीदों को पूरा करने का बड़ा दायित्व भी था, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।

Aanchal anurag cracks NEET UG 2026

शुरुआत से ही मेधावी 

आंचल अनुराग शुरुआत से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी होनहार रही हैं। उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में 79 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा की पहली धमक दिखाई थी। इसके बाद इंटरमीडिएट की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 86 प्रतिशत अंक हासिल किए।

इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही आंचल की आंखों में सफेद कोट पहनकर डॉक्टर बनने का सपना तैरने लगा था। इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया और पूरी निष्ठा के साथ तैयारी में जुट गईं।

सेवा भाव से डॉक्टर बनने की प्रेरणा

अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों और माता-पिता को देते हुए आंचल बताती हैं कि उन्हें मेडिकल क्षेत्र में जाने की प्रेरणा दूसरों के सेवा भाव और मरीजों के प्रति डॉक्टरों के समर्पण को देखकर मिली।

हालांकि, नीट के पहले प्रयास में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों को पहचाना।

पहले प्रयास की विफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने और दोगुनी ताकत से तैयारी करने का फैसला किया। इसके बाद वे बिहार की राजधानी पटना चली गईं और वहां रहकर एक निजी कोचिंग संस्थान से व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से नीट की तैयारी शुरू की।

कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन

पटना में रहकर आंचल ने दिन-रात एक कर दिया। शिक्षकों के सही मार्गदर्शन, सटीक रणनीति और अपनी अनवरत कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में नीट यूजी की कठिन बाधा को पार कर लिया।

आंचल की इस बड़ी उपलब्धि से उनके पूरे परिवार और बेगूसराय के गाछी टोला इलाके में जश्न का माहौल है। माता-पिता अपनी लाडली की इस ऐतिहासिक सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं।

भाई-बहनों का सपना साकार करने का लक्ष्य

अब डॉक्टर बनने की राह पर आगे बढ़ चुकीं आंचल का लक्ष्य सिर्फ एक सफल चिकित्सक बनना ही नहीं है, बल्कि वे अपने छोटे भाइयों और बहन के लिए भी मार्गदर्शक बनना चाहती हैं।

आंचल का कहना है कि वे मुजफ्फरपुर में रहकर पूरी लगन से अपनी पढ़ाई पूरी करेंगी और डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने के साथ-साथ अपने छोटे भाई-बहन के सपनों को साकार करने में उनका पूरा सहयोग करेंगी।

आंचल की यह कहानी आज ग्रामीण बिहार की उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस करती हैं।

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