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Muzaffarpur: गरीबों की पहुंच से दूर आयुष्मान कार्ड, झोलाछाप के हाथों जब जान पर आती आफत तब जागते हैं अधिकारी

Ayushman Card in Muzaffarpur मुजफ्फरपुर में आज भी आयुष्मान कार्ड गरीबों की पहुंच से दूर है। जब गरीबों की जान आफत में आती है तो विभाग कार्ड बनाने के लिए इनकी खोज शुरू करता है। सुनीता के किडनियां गंवाने के बाद अब विभाग पिंकी को खोज रहा है।

By Amrendra TiwariEdited By: Ashish PandeyPublished: Thu, 30 Mar 2023 04:47 PM (IST)Updated: Thu, 30 Mar 2023 04:47 PM (IST)
गरीबों की पहुंच से दूर आयुष्मान कार्ड, सुनीता के किडनियां गंवाने के बाद अब पिंकी को खोज रहा विभाग।

अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर: गरीबों के बेहतर इलाज के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना का लाभ गरीबों को जितना मिलना चाहिए था वह नहीं मिल रहा। योजना का लाभ लेने के लिए आयुष्मान कार्डधारक होना जरूरी है, लेकिन कार्ड बनने की स्थिति यह है कि अभी जिले में एक लाख से ज्यादा परिवारों के हाथ में कार्ड तक नहीं है। इससे गरीब लोग झोलाछाप डॉक्टरों के यहां जाकर कर्ज लेकर इलाज कराने के बाद जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। आरोप है कि जिस तरह से प्रचार-प्रसार व समन्वय बनाकर यह कार्ड बनना चाहिए था, उस तरह से नहीं बन रहा है।

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जब निकाल दी मूत्रनली तो आयुष्मान कार्ड के लिए हो रही खोज

सकरा में एक झोलाछाप के यहां बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने गई सुनीता की दोनों किडनियां निकल दी गईं। वह एसकेएमसीएच गई तो आनन-फानन में उसका आयुष्मान कार्ड बनाया गया। इसी तरह दो दिन पहले पिंकी कुमारी का मामला सामने आया है। एक झोलाछाप ने सकरा के बरियारपुर में ऑपरेशन के दौरान उसकी मूत्रनली काट दी। अब वह जीवन व मौत से जूझ रही हैं। पिंकी के स्वजनों ने बताया कि कर्ज लेकर इलाज करा रहे हैं। इधर एक बार फिर विभाग के अधिकारी उसकी तलाश में है। उससे मिलने के बाद अगर उसका नाम आयुष्मान भारत के दायरे में होगा तो उसका कार्ड बना दिया जाएगा।

आयुष्मान कार्ड बनाने की ये है रफ्तार

जिले में 5,20,724 कार्ड बनाने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 1,76,982 लोगों को ही कार्ड मिल सका है। आयुष्मान कार्ड के आधार पर 24,91,879 सदस्यों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा। बाकी अभी तक जो विभागीय आंकड़ा सामने आया है, उसके हिसाब से 3,61,944 कार्डधारी परिवार के सदस्यों ने इसका लाभ लिया है। सरकारी अस्पताल में 14,933 कार्डधारकों का इलाज हुआ, जिसके एवज में विभाग की ओर से कुल 13,20,06,477 रुपये का भुगतान किया गया है। इसी तरह निजी अस्पताल में 26,244 लोगों का इलाज किया गया, जिसके एवज में 13,41,24,027 रुपये का भुगतान किया गया है। इलाज के लिए 19 सरकारी व 43 निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है।

ऐसे बनवाएं आयुष्मान कार्ड

आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए पारिवारिक समग्र आइडी के साथ एक पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आइडी, सरकारी पहचान पत्र) चाहिए। उसके बाद कामन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र, यूटीआइ-आइटीएसएल केंद्र पर जाकर पात्रता जांच कराने के बाद कार्ड बन जाता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

"आयुष्मान कार्ड अब पंचायत स्तर पर बन रहा है। इसके साथ ही इस योजना के तहत चयनित अस्पतालों व जागरूकता को लेकर प्रखंड व पीएचसी स्तर पर पोस्टर लगाए गए हैं। सीएस ने कहा कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए आने वाले दिनों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।"

-डा.यूसी शर्मा, सिविल सर्जन डा.यूसी शर्मा

"पंचायत में कार्यपालक सहायक या वसुधा केंद्र पर मुफ्त में कार्ड बनता है। इसके साथ जगह-जगह शिविर लगाकर भी कार्ड बनाया जा रहा है। आम लोगों से अपील है यदि वह आयुष्मान कार्ड के दायरे में आ रहे है तो अपना कार्ड अवश्य बनवा लें। इस कार्ड के दायरे में भवन निर्माण विभाग के मजदूर जिनके पास श्रम कार्ड है उनका भी आयुष्मान कार्ड बन रहा है। हर सरकारी अस्पताल में भी कार्ड बनाया जाता है।"

-विद्यासागर, समन्वयक, आयुष्मान भारत योजना


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