यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 02, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मुशहरी पीएचसी से नर्स रहती गायब, गार्ड करता इलाज
मुशहरी पीएचसी में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी गायब रहते हैं।

मुजफ्फरपुर : मुशहरी पीएचसी में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी गायब रहते हैं। इमरजेंसी में आए मरीजों का इलाज पीएचसी के सुरक्षा गार्ड करते हैं। सोमवार की शाम साढ़े 5 बजे नरौली से हरिश्चंद्र महतो और कौशल्या देवी कुत्ते के काटने से जख्मी होकर पीएचसी पहुँचे। इमरजेंसी का पुर्जा कटाया, लेकिन इमरजेंसी ड्यूटी से एएनएम गायब मिली। दोनों दर्द से कराह रहे थे। इसी दौरान सभापुर निवासी सुरेश दास(32वर्ष) कोरोना वैक्सीन लेने पहुंचे, लेकिन वहां कोई नहीं था। उनकी जगह पर पीएचसी के पार्क में वैक्सीन का डब्बा पड़ा था। इसी बीच एक पंसस ने सिविल सर्जन को फोन कर सूचना दी कि एएनएम के बदले सुरक्षा गार्ड पट्टी बाध रहा है। कोरोना वैक्सीन रात्रि 9 बजे तक दिया जाना है लेकिन कोई नहीं है। सीएस ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. राजेश कुमार को फोन कर फटकार लगाई और कार्यप्रणाली में सुधार लाने की चेतावनी दी। उसके बाद एएनएम अनिता कुमारी ने घायल मरीजों को एंटीरेबिज सूई दी। जबकि मानव बल अभिषेक कुमार ने कोरोना की वैक्सीन सुरेश दास को दी। दोपहर 2 बजे से रात्रि 8 बजे किस एएनएम की ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड और वैक्सीनशन में किसकी ड्यूटी थी, यह जानकारी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य प्रबंधक ने नहीं दी।
सदर अस्पताल के आउटडोर में नहीं मिले चिकित्सक, सीएस ने बुलाकर कराया इलाज
: सदर अस्पताल की इलाज व्यवस्था बेपटरी चल रही है। मुख्य सचिव के निरीक्षण के बाद जो हिदायत मिली उसका अब तक पालन नहीं हो रहा। अस्पताल के स्टोर में जितनी तरह की दवा उपलब्ध है, वह मरीजों को नहीं मिल रही। इसके कारण बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। आउटडोर में समय पर चिकित्सक नहीं आ रहे हैं। रोस्टर का पालन नहीं हो रहा। पूरे परिसर में सफाई मानक के हिसाब से नहीं हो रही है। हर माह सफाई के नाम पर मोटी रकम सरकारी खजाने से खर्च हो रही, फिर भी गंदगी कायम है। कुछ इस तरह की कुव्यवस्था से सोमवार को सिविल सर्जन डा.विनय कुमार शर्मा का सामना हुआ। उन्होंने सदर अस्पताल के ओपीडी का निरीक्षण किया तथा वहां पर सुधार को लेकर हिदायत दी।
इस तरह का दिखा नजारा
सिविल सर्जन अपने कक्ष से डा हसीब असगर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक बीपी वर्मा के साथ निकले। सभी ओपीडी कक्ष में जाकर स्थिति को देखा। निरीक्षण के दौरान हड्डी विभाग में चिकित्सक के नहीं रहने पर उन्होंने फोन कर उन्हें ओपीडी में बुलाया। उसके बाद मरीजों का इलाज कराया। सीएस ने चिकित्सकों को हिदायत दिया कि मरीज रहने या नहीं रहने पर सुबह आठ से दो बजे तक अपने कक्ष में रहे। सीएस ने इलाज कराने आए मरीजों से भी पूछा कि उन्हें दवा मिली या नहीं मिली हैं। मरीजों ने कुछ दवा नहीं मिलने की शिकायत की। शिकायत पर सीएस दवा वितरण काउंटर पर पहुंचे। उनको जानकारी मिली कि दवा स्टोर में है तो काउंटर पर दवा क्यों नहीं है। इस पर आश्चर्य करते हुए कहा कि जब दवा स्टोर में है तो वितरण काउंटर पर भी रहनी चाहिए। उनको जानकारी मिली कि अस्पताल के प्रभारी प्रबंधक ने इंडेंट बना कर स्टोर में नहीं भेजा था, जिस कारण दवा उपलब्ध नहीं हो रहा है। एमसीएच का निरीक्षण किया जहा डाक्टर उपलब्ध थे। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक को नियमित जांच कर आउटडोर की रिपोर्ट देने का टास्क दिया। सीएस ने यह दिया टास्क
- 24 घटे हो सफाई, परिसर से लेकर वार्ड तक दिखे चकाचक
--मेडिकल कचरा का हो नियमित उठाव, वरना सफाई वाली आउटसोर्सिग एजेंसी के बिल से होगी कटौती, काली सूची में डाला जाएगा
- जहा जल जमाव वहा पर डीडीटी व टेमीफास का होगा छिड़काव
--कितनी दवा ओपीडी में उपलब्ध जारी हो सूची, चिकित्सक का रोस्टर हो डिस्प्ले
