नक्सलियों व अपराधियों को होती थी कारतूसों की खपत

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अवैध आ‌र्म्स कारखाना देख

एसएसपी भी रह गये सन्न

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मुजफ्फरपुर, कासं : बेला औद्योगिक इलाके के इमलीचौक स्थित किराये के मकान में चल रहे अवैध कारतूस बनाने की फैक्ट्री के खुलासे के बाद रविवार की दोपहर एसएसपी राजेश कुमार ने घटनास्थल का मुआयना किया। किराये के चार कमरों में चल रहे कारतूस फैक्ट्री को देख एसएसपी भी हैरान हो गये। एसएसपी ने कहा कि गैरकानूनी कार्य में शामिल दोनों लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर जल्द ही स्पीडी ट्रायल चलाया जायेगा। ताकि जल्द से जल्द इन्हें सजा दिलायी जा सके।

एसएसपी ने बताया कि लगभग बीस लाख की लागत से लेथ मशीन बैठाकर श्रीकांत सिंह कारतूस फैक्ट्री चला रहा था। मशीन देखकर प्रतीत होता है कि यहां बड़े पैमाने पर हथियार व कारतूस बनाये जा रहे थे। उन्होंने बताया पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यहां बनाये गये कारतूस व हथियार नक्सलियों तथा अपराधियों के ठिकाने तक पहुंचाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीकांत तकनीकी रूप से एक्सपर्ट है। वह पूर्व में भी वर्ष 2006 में कुढ़नी के रजला में रॉकेट लांचर व हथियार बनाते हुए पकड़ा गया था। लगभग एक वर्ष तक जेल में रहने के बाद वह जमानत पर 2007 में छूटा था। जेल से निकलने के बाद वह जमशेदपुर की एक फैक्ट्री में काम करने लगा था। इसी बीच वह बैरिया के ही एक किराये के मकान पर में रहने लगा। लेकिन, जमशेदपुर आता जाता रहा। पुलिस पूछताछ में श्रीकांत ने यह खुलासा नहीं किया कि वह वर्ष 2008 से लेकर वर्ष 2010 तक कहां रहा। पूछताछ में श्रीकांत ने बताया कि इसी साल मार्च से वह बेला में रहकर अपना धंधा कर रहा था। वह सिलाई बुनाई की मशीन बनाने के लिए लेथ मशीन लगाने की बात कहकर कमरे को किराये पर लिया था। सिलाई बुनाई की मशीन के साथ ही लेथ मशीन भी बनाने लगा। लेथ मशीन बनाने में उसे काफी क्षति हुई। तो वह पुन: गलत धंधे में उतर गया। इसी बीच उसकी मुलाकात खरौना निवासी विपिन कुमार से हुई तो अधिक पैसे कमाने की बात कहकर अपने साथ जोड़ लिया। छह माह की ट्रेनिंग में ही विपिन कारतूस बनाने का एक्सपर्ट हो गया।

एसएसपी के मुताबिक श्रीकांत से मिली महत्वपूर्ण जानकारियों पर और लोगों की गिरफ्तारी के लिए टीमें शहर के अलावा कई जिलों में भेजी गई हैं। उम्मीद है कि कई बड़ी सफलताएं हाथ लगेंगी।

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