रक्सौल (पूर्वी चंपारण), जासं। रक्सौल शहर के डंकन अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट को शुरू करने के लिए स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा उर्फ कुशुवाहाजी ने प्रयास शुरू कर दिया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और विद्युत विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। इसके उपरांत मोतिहारी जिलाधिकारी  से आग्रह किया कि कोरोना संक्रमण काल में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए उक्त प्लांट को तत्काल शुरू करना आवश्यक है। इससे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के कोविड संक्रमित लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। अस्पतालों के लिए आक्सीजन पर्याप्त मात्रा  में मिल सकता है। पिछले दस दिनों से  जो आक्सीजन की किल्लत को झेला जा रहा है,उससे राहत मिल जाएगी। फिलहाल डंकन अस्पताल को प्रशासन की अनुमति पर आक्सीजन लेना पड़ रहा है। उसके लिए जिला प्रशासन के निर्देश पर रक्सौल से करीब 60 किलोमीटर दूर मोतिहारी के हरसिद्धि या बेतिया से आक्सीजन सिलेंडर प्राप्त होता है। इसके लिए एक दिन यानी चार से छह घण्टे समय लगता है।

कितना होगा उत्पादन

रक्सौल डंकन अस्पताल का आक्सीजन प्लांट 24 घण्टे में 60 सिलेंडर उत्पादन कर सकता है। इसके साथ आवश्यकता पड़ने पर इसकी क्षमता को बढ़ाया भी जा सकता है। इसके लिए कुछ और उपकरण उसमें जोड़ना होगा।  फिलहाल रक्सौल डंकन अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए 60 बेड हैं। जिसके लिए 70 सिलेंडर की आवश्यकता है। जिसमे  करीब 50 सिलेंडर उपलब्ध है। कोरोना संक्रमण के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए  बेडों की संख्या सौ करने की योजना है।

कहा फंसा है पेंच

आक्सीजन प्लांट शुरू करने के लिए निर्वाध गति से 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति आवश्यक है। इसके लिए विधुत विभाग आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ करे। इसके अलावा रेलवे कोरोना काल में अगर विधुत आपूर्ति की अनुमति देता है, तो डंकन अस्पताल का आक्सीजन प्लांट शुरू हो सकता है।

बोले डंकन अस्पताल के प्रतिनिधि

डंकन अस्पताल प्रबन्धन से नियुक्त प्रतिनिधि माइकल औए समीर डिग्गल ने बताया कि फिलहाल जो डंकन को विधुत आपूर्ति हो रही है, उसके अलावा विधुत की आवश्यकता है। आक्सीजन प्लांट को प्रतिदिन एक केवीए विधुत निर्बाध गति से चाहिए। इसके लिये स्थानीय विधायक और अनुमंडल प्रशासन को जानकारी दी गई है। विधायक श्री कुशवाहा इसके लिए पहल कर रहे हैं। शीघ्र ही आक्सीजन प्लांट शुरू होने की उम्मीद है।

Edited By: Murari Kumar