मुजफ्फरपुर : केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन व डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मत्स्यकी महाविद्यालय पूर्वी भारत का मॉडल कॉलेज के रूप में विकसित हो रहा है जहा हेचरी सहित मत्स्य उत्पादन के सभी मॉडल होगा जिसे देखकर छात्र ज्ञान अर्जित कर सकेंगे। कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मत्स्यकी काउंसिल का गठन हो और इस क्षेत्र को विकसित सोच के साथ आगे बढ़ाया जाए। वे मत्स्यकी महाविद्यालय, ढोली में पुनजल परिचालन प्रणाली एवं प्रयोगशाला, पुस्तकालय भवन का उदघाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। किसानों की आमदनी मत्स्यकी, उद्यान के क्षेत्र में ही बढ़ाया जा सकता है। मत्स्यकी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। मछली उत्पादन में विश्व स्तर पर हमारा देश दूसरे स्थान पर है। हम 75 हजार करोड़ की मछली का निर्यात कर रहे हैं। कहा कि यहां के छात्र नौकरी करने वाली नहीं, दूसरों को नौकरी देने वाली मानसिकता को विकसित करें। अगर हमारी सोच केवल नौकरी पाने तक सीमित होगी तो हम कुछ नया नहीं सोच सकते। इसलिए अपनी सोच को बदलने की जरूरत है। मछली पौष्टिकता का बहुत बढि़या स्रोत है, पंरतु अभी भी इसका उपयोग लोग कम कर रहे हैं। आज बंगलादेश मत्स्यकी के क्षेत्र में हम लोगों से काफी आगे है। उन्होंने वैज्ञानिकों व छात्रों से आह्वान किया कि वे कम लागत खर्च में उन्नत क्वालिटी के मछली उत्पादन की तकनीक विकसित करने को अनुसंधान करें। मौके पर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि के कुलपति डॉ. आरसी श्रीवास्तव, अधिष्ठाता डॉ.एससी राय, कुलसचिव डॉ.रविनंदन, निदेशक अनुसंधान डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ.शिवेंद्र कुमार, अधिष्ठाता डॉ.अशोक कुमार सिंह, जगन्नाथ ठाकुर ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ.एसके सुमन ने किया।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस