मुजफ्फरपुर, जेएनएन। माघ मास की पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्व बताया गया है। मंगलवार को माघी पूर्णिमा के अवसर पर लोग गंगा सहित पवित्र जलाशयों में स्नान के बाद पूजा-अर्चना व दानादि करेंगे। ब्रह्मपुरा स्थित बाबा सर्वेश्वरनाथ मंदिर के आचार्य पं.अभिनय पाठक और रामदयालु स्थित मां मनोकामना देवी मंदिर के पुजारी पं.रमेश मिश्र बताते हैं कि पुराणों के अनुसार माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान, जप, दानादि करने से सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है।

 वैसे तो पूरे माघ माह में गंगा स्नान का खास महत्व बताया गया है। मगर, जो लोग पूरे महीने गंगा स्नान नहीं कर सके, वे माघ पूर्णिमा के दिन माघ स्नान अवश्य करें। ऐसा करने वालों को भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। व्यक्ति को सुख-समृद्धि और संतान के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।

माघ मास में धरती पर वास करते भगवान

हरिसभा चौक स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी पं.रवि झा बताते हैं कि मान्यता है कि माघ मास में देवता भी मानव रूप धारण कर पृथ्वी पर वास करते हैं। यहां गंगा तट पर स्नान, जप और दानादि करते हैं। इसके चलते कहा जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही मोक्ष मिलता है। माघ पूर्णिमा पर व्रत, स्नान, जप, तप, हवन और दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

ऐसे करें पूजा

सूर्योदय के पूर्व गंगा नदी या किसी पवित्र जलाशय में स्नानादि के बाद सूर्यदेव को जल दें। इस दौरान 'ऊं घृणि सूर्याय नम:Ó मंत्र का जाप करते रहें। फिर पूर्णिमा व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के बाद दानादि करें। इस दिन तिल और कंबल का दान करने से नरक लोक से मुक्ति मिलती है। हवन और पितरों का तर्पण करें। इस दिन झूठ बोलने से बचें।

 

Posted By: Ajit Kumar

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