सीतामढ़ी, जासं। कोरोना में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए पर जमीनी हालात में बहुत ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिल पाया है। अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को ही लीजिए। सीतामढ़ी जिले के विभिन्न प्रखंडों में 28 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में 16 बंद हैं। जो 12 चल रहे हैं उनकी हालत भी बेहद खस्ताहाल है। जन आरोग्य प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत गांवों में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में तब्दील करना है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित कराने के साथ गंभीर रोगों वाले मरीजों की पहचान कर इलाज के लिए कारगर कदम उठाना है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) व एएनएम तैनात रहती हैं।

न डाक्टर न पारामेडिकल स्टाफ इसलिए बंद हैं ये सेंटर

इन सेंटरों पर डाक्टर से लेकर पारा मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है। जिस वजह से सेंटर का कामकाज ठप पड़ा हुआ है। बथनाहा, रीगा में सेंटर खुलने के साथ ही बंद हो गए। कई सेंटरों का मुआयना किया गया तो वहां वीरानगी छाई हुई थी। सेंटर पर ताले लटक रहे थे। पूर्व डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा के कार्यकाल में इन सेंटरों का उदघाटन हुआ था। कुछ दिन बाद ही इन सेंटरों पर ताले लटक गए। यहीं हाल नानपुर के वेलनेस सेंटर का भी है। कोविड-19 से निपटने के लिए स्टाफ को जहां-तहां लगाया गया जिससे इन सेंटरों से भी डाक्टर-स्टाफ हटाकर दूसरी जगह प्रतिनियुक्त कर दिए गए। उसके बाद से ये सेंटर बंद ही पड़ गए। स्वास्थ्य विभाग हालांकि, यह कहता है कि वेलनेस सेंटर चालू तो हैं लेकिन, कर्मियों के अभाव में इलाज की समस्या है।

नाम बदला, व्यवस्था बदल नहीं सकी

आम लोगों को ग्रामीण स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाने के लिए पूरे तामझाम के साथ जिले में कई स्थानों पर हेल्थ वेलनेस सेंटर खोला गया। स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े बोर्ड लगाए गए। डाक्टर, एएनएम सहित पैथोलॉजी की व्यवस्था का दावा किया गया। फीता काटकर उदघाटन भी हुआ। उदघाटन के साथ ही यहां ताले लटक गए, अब तक यही हाल है। अतिरिक्त स्वास्थ्य उप केंद्र का नाम बदलकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कर दिया मगर, आलम यह है कि वहां बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं है। प्रखंडों में तीन या चार पंचायतों में एक वेलनेस सेंटर है। स्वास्थ्य उपकेंद्रों को ही आधारभूत संरचना व सुविधाएं उपलब्ध करा कर उन्हें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बदलनेवाला था।

28 सेंटरो महज 18 सीएचओ कार्यरत हैं। अन्य जगहों के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से बहाली की प्रतीक्षा है। डाक्टर बहाल हो जाएंगे तो ये सेंटर बिना बाधा नियमित रूप से चालू हो जाएंगे।

डा. सुरेश चंद्र लाल, सिविल सर्जन, सीतामढ़ी।