मुंगेर में फिर से चालू हो सकती हैं बंद पड़ी पत्थर खदानें, 10000 मजदूरों को मिलेगा रोजगार
मुंगेर में वर्ष 2003 से बंद पड़े पत्थर खदानों को फिर से चालू करने की कवायद शुरू हो गई है।

फिर से शुरू होंगे बंद पड़े पत्थर खदान। (जागरण)
HighLights
वन क्षेत्र से पहाड़ के किनारे वाले हिस्से को अलग करने की पहल।
बंद पड़े पत्थर खदानों को फिर से चालू करने की तैयारी।
हजारों मजदूरों को रोजगार और सरकार को भारी राजस्व का लाभ।
मनोज कुमार, मुंगेर। जिले में वन क्षेत्र के अधीन पड़ने वाले पहाड़ के किनारे वाले हिस्से को वन क्षेत्र से अलग किये जाने की कवायद शुरू हो गयी है।
ताकि वर्ष 2003 के बाद से बंद पड़े पत्थर खदानों को फिर से चालू किया जा सके। सरकार अगर पत्थर खदानों को फिर से चालू करने का आदेश जारी करती है तो जमालपुर और मुंगेर के दस हजार मजदूर प्रत्यक्ष रूप से रोजगार से लाभान्वित होंगे। जबकि खनन विभाग को प्रति वर्ष सौ करोड़ से अधिक के राजस्व की प्राप्ति होगी।
साथ ही पत्थर व्यवसाय से जुड़े व्यवसायी भी लाभान्वित होंगे और जिले का पत्थर उद्योग फिर से पुनर्जीवित हो सकेगा। इस तरह खदान से निकलने वाले पत्थर से मुंगेर की तकदीर बदल जाएगी।
इसको लेकर जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर जिले में वर्ष 2003 से बंद पड़े पत्थर खदानों को चालू कराने का आग्रह किया है।
विधायक ने जिले के वन क्षेत्र और वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र का फिर से सर्वेक्षण कराने की मांग की है। विधायक ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया है कि वन क्षेत्र और वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र के कारण पत्थर उद्योग बंद है।
वन क्षेत्र और वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र का फिर से सर्वेक्षण करा पहाड़ के किनारे वाले हिस्से को वन क्षेत्र से मुक्त कर पत्थर खदान चालू कराया जा सकता है।
पत्थर खदान चालू होने से हजारों मजदूरों को रोजगार मिलेगा, मुंगेर का आर्थिक विकास भी तीव्र गति से होगा। दूसरी ओर खान व भूतत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह ने डीएम से मुंगेर में वन क्षेत्र और गैर वन क्षेत्र का सर्वेक्षण करा रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया है।
इधर डीएम के निर्देश पर खनन विभाग मुंगेर के अधिकारी गैर वन क्षेत्र और वन क्षेत्र का सर्वेक्षण कर प्रतिवेदन खनन व भूतत्व विभाग पटना को भेजने की तैयारी में जुटी है। इसके बाद खनन कार्यालय मुंगेर के माध्यम से जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट डीएसआर तैयार किया जाएगा।
गैर वन क्षेत्र में संचालित पत्थर खदान भी है बंद
जिले में गैर वन भूमि में संचालित पत्थर खदान भी वर्ष 2013 के बाद से बंद पड़े हैं। गैर वन भूमि में पत्थर खदान संचालित करने वाले पट्टाधारियों को 20 साल का लीज दिया गया था।
लेकिन बीस वर्ष की लीज अवधि पूर्ण होने के बाद लीज नवीकरण नहीं कराने पर सदर प्रखंड के शीतलपुर में गैर वन क्षेत्र में संचालित तीन खदान को बंद कर दिया गया। वर्तमान में गैर वन क्षेत्र के तीनों लीजधारी हाईकोर्ट की शरण में हैं।
वन क्षेत्र में अधिकांश पत्थर खदान
जिले के अधिकांश पत्थर खदान वन क्षेत्र में संचालित थे। वन क्षेत्र में संचालित रहने के कारण वर्ष 2003 के बाद सरकार की पर्यावरण बचाओ नीति के कारण जिले के सभी पत्थर खदान और क्रसर के बंद होने से मजदूर बेरोजगार हो गए।
खनन विभाग से जुड़े अधिकारी की मानें तो कई जगह पहाड़ के किनारे वाले हिस्से को वन क्षेत्र में रखा गया है। फिर से सर्वेक्षण में पहाड़ के किनारे वाले हिस्से को वन क्षेत्र से हटा कर वहां पत्थर खदान शुरू कराया जा सकता है।
जिले में वन क्षेत्र और गैर वन क्षेत्र में पड़ने वाले पहाड़ और पत्थर का सर्वेक्षण रिपोर्ट डीएम से मांगी गयी है। रिपोर्ट मिलने के बाद कहां कहां खदान के लिए वन क्षेत्र से पहाड़ को हटाया जा सकता है, इसका रिपोर्ट तैयार कराया जाएगा।
अवनीश कुमार सिंह, सचिव, खान व भूतत्व विभाग
वर्षों से बंद पड़े पत्थर खदान को फिर से चालू करने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है। पत्थर खदान में आड़े आ रही वन क्षेत्र और वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र का फिर से सर्वेक्षण करा बंद पड़े पत्थर खदान को चालू कराने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया गया है। अगर पत्थर खदान चालू होता है तो दस हजार मजदूर प्रत्यक्ष रूप से से लाभान्वित होंगे। मुंगेर का आर्थिक विकास भी तीव्र गति से हो सकेगा।
