मुंगेर [प्रणत भारती]। छत्तीसगढ के दंतेवाडा जिले में हुए नक्सली हमले में सात जवान के शहीद होने की घटना ने एक बार फिर लोगों को  हवेली खड़गपुर के भीमबांध मुख्य मार्ग पर वर्ष 2005 में हुए नक्सली हमले की याद दिला दी । आज भी लोग इस घटना को याद कर सिहर उठते हैं, क्योंकि इस हमले में भी मुंगेर जिले के तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू के साथ ही पांच पुलिस जवान को नक्सलियों ने बारूदी सुरंग विस्फोट कर मौत के घाट उतार दिया।  

क्या था भीमबांध हादसा

05 जनवरी 2005 को मुंगेर व जमुई पुलिस ने संयुक्त रूप से जंगली क्षेत्र में नक्सलियों के विरुद्ध छापामारी अभियान चलाया था। छापामारी जब एसपी केसी सुरेंद्र बाबू अपने वाहन से वापस लौट रहे थे, तो शाम के लगभग छह बजे सोनरवा के समीप नक्सलियों ने बारूदी सुरंग विस्फोट किया। जिसमें एसपी केसी सुरेंद्र बाबू के अलावे पांच जवान ओमप्रकाश गुप्ता, मु.अब्दुल कलाम, मु.इस्लाम, शिव  कुमार पासवान, ध्रुव ठाकुर शहीद हो गए थे।

वहीं 10 अप्रैल 2014 में लोक सभा चुनाव के दौरान साबालाख बाबा स्थान के समीप नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया था। नक्सलियों ने बारुदी सुरंग विस्फोट करने के बाद सीआरपएफ जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग भी की।

इस हमले में सीआरपीएफ जवान हवलदार सोम गौडा व रविंद्र कुमार राय की मौत  हो गई। वहीं, एक जवान अशोक कुमार बेसरा घायल हो गए थे। वहीं, पूर्व एसपी आशीष भारती को भी नक्सलियों ने ट्रैप करने की योजना बनाई थी।

एसपी एक कार्यक्रम में भीमबांध गए थे। तब तक नक्सलियों ने एआइइडी लगा दिया। लेकिन, एसपी जमुई की ओर निकल गए। बाद में एएसपी अभियान और एसएसबी जवानों द्वारा चलाए गए सर्च अभियान के दौरान एआइइडी बरामद किया गया। 

इधर, एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़  में हुई घटना को लेकर क्षेत्र में सतर्कता बरती जा रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में लगातार गश्त व सर्च आपरेशन चलाया जा रहा है।

Posted By: Kajal Kumari