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मुंगेर यूनिवर्सिटी के VC की कुर्सी पर 'बॉस' बनकर बैठा क्लर्क, वीडियो वायरल होने पर हुई छुट्टी

Published: Wed, 26 Aug 2026 05:30 PM (IST)

मुंगेर विश्वविद्यालय में कुलपति की कुर्सी पर बैठकर मोबाइल चलाते लिपिक रवि रंजन का वीडियो वायरल होने के बाद उसकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी गई है।

मुंगेर यूनिवर्सिटी के VC की कुर्सी पर 'बॉस' बनकर बैठा क्लर्क, वीडियो वायरल होने पर हुई छुट्टी

मुंगेर यूनिवर्सिटी के VC की कुर्सी पर 'बॉस' बनकर बैठा क्लर्क, वीडियो वायरल होने पर हुई छुट्टी

HighLights

  1. लिपिक रवि रंजन का कुलपति की कुर्सी पर वीडियो वायरल।

  2. विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसकी प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त की।

  3. कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय कर्मियों में उठ रहे सवाल।

जागरण संवाददाता, मुंगेर। मुंगेर विश्वविद्यालय में कुलपति की कुर्सी पर बैठकर मोबाइल चलाते हुए निम्न वर्गीय लिपिक रवि रंजन का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी है।

इसके बाद उसे मूल महाविद्यालय केकेएम कॉलेज, जमुई वापस भेज दिया गया है। संबंधित कर्मी को दो दिनों के भीतर मूल महाविद्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

दरअसल, पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कुलपति कार्यालय में प्रतिनियुक्त रवि रंजन का एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ था। वीडियो में वह कुलपति की कुर्सी पर बैठकर मोबाइल फोन चलाता दिखाई दे रहा था। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी।

कमेटी ने मंगलवार को मामले की जांच करते हुए संबंधित लिपिक से पूछताछ भी की। जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति कार्यालय से उसकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल महाविद्यालय भेजने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि रवि रंजन की पिछले वर्ष 2025 में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति हुई थी।

नियुक्ति के बाद उसे कुलपति कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया था। इधर, विश्वविद्यालय के सर्वोच्च प्रशासनिक पद से जुड़े कार्यालय और कुर्सी की मर्यादा के उल्लंघन के मामले में केवल प्रतिनियुक्ति समाप्त किए जाने की कार्रवाई को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

विश्वविद्यालय कर्मियों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे संवेदनशील मामले में कार्रवाई का दायरा इतना सीमित क्यों रखा गया।

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