मुंगेर में आंधी के साथ गिरे ओले, फसलें बुरी तरह प्रभावित; किसानों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
मुंगेर जिले में शुक्रवार को तेज आंधी और ओलावृष्टि से किसानों की चिंता बढ़ गई है। इससे दलहनी, बागवानी, मूंग, ...और पढ़ें
HighLights
मुंगेर में तेज आंधी और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान।
दलहनी, बागवानी, गेहूं, आम, लीची की फसलें प्रभावित हुईं।
किसानों ने प्रशासन से मुआवजे और सर्वे की मांग की।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। जिले में शुक्रवार को अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। दोपहर बाद तेज आंधी के साथ हुई ओलावृष्टि ने कई इलाकों में जमकर कहर बरपाया। तेज हवा के झोंकों और ओलों की मार से खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कुछ जगहों पर ओले इतने बड़े थे कि किसानों ने उन्हें पत्थर जैसे बताया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते तेज हवा चलने लगी। इसके बाद बारिश के साथ ओले गिरने लगे। आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई जगहों पर पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गईं और बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई।
कृषि विज्ञानी प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि हवा की रफ्तार लगभग 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की आंधी और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान दलहनी और बागवानी फसलों को होता है।
मूंग, लीची, आम, गेहूं और हरी सब्जियों की फसल को भारी क्षति पहुंची है। किसानों ने बताया कि गेहूं की कटाई अंतिम चरण में थी, लेकिन ओलों की मार से दाने झड़ गए और फसल जमीन पर बिछ गई।
वहीं, आम और लीची के बागानों में भी भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। छोटे किसानों के लिए यह नुकसान किसी बड़े झटके से कम नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति भी बन गई, जिससे सब्जियों की खेती प्रभावित हुई है।
किसानों का कहना है कि पहले ही लागत बढ़ने से वे परेशान थे, अब प्राकृतिक आपदा ने उनकी कमर तोड़ दी है। किसानों ने प्रशासन से क्षति का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। कृषि विभाग की टीम से भी प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने की अपेक्षा जताई जा रही है, ताकि समय रहते राहत मिल सके।
