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बाढ़ ने छीना घर, ट्रेनों ने नींद; मुंगेर में रेलवे ट्रेक के किनारे रहने को मजबूर पीड़ित

Published: Mon, 07 Sep 2026 11:01 AM (IST)

गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण मुंगेर के नीरपुर पंचायत के लालजी टोला के लोग बेघर हो गए हैं। वे ...और पढ़ें

रेलवे ट्रैक के बगल में पीड़ित। फोटो जागरण

रेलवे ट्रैक के बगल में पीड़ित। फोटो जागरण

HighLights

  1. गंगा के बढ़ते जलस्तर से लालजी टोला के लोग विस्थापित।

  2. परिवारों ने बरियारपुर-कल्याणपुर रेल ट्रैक पर ली शरण।

  3. बुनियादी सुविधाओं की कमी, बीमारी का खतरा बढ़ा।

संवाद सहयोगी, बरियारपुर (मुंगेर)। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने नीरपुर पंचायत के लालजी टोला के लोगों से घर का सुकून छीन लिया है। बाढ़ का पानी घरों के आसपास पहुंचने के बाद कई परिवार सुरक्षित स्थान की तलाश में बरियारपुर- कल्याणपुर के बीच रेल ट्रैक के किनारे शरण लेने को मजबूर हैं।

यहां न बिस्तर है, न पंखा और न ही रात में चैन की नींद। ऊपर से कुछ ही दूरी से गुजरती ट्रेनों की आवाज हर थोड़ी देर में लोगों की बेचैनी बढ़ा देती है। दिन में किसी तरह सामान समेटने और बच्चों को संभालने में समय बीत जाता है।

शाम होते ही परेशानी और बढ़ जाती है। महिलाएं बच्चों को लेकर खुले स्थान पर बैठी रहती हैं, जबकि पुरुष रातभर जागकर सामान और मवेशियों की निगरानी करते हैं।

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लोगों का कहना है कि घर छोड़ना मजबूरी थी। गंगा का पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसमें घर के अंदर रहना खतरे से खाली नहीं था। रेल ट्रैक के किनारे प्लास्टिक और तिरपाल के सहारे परिवारों ने अस्थायी ठिकाना बना लिया है।

कुछ लोग जरूरी सामान को बोरे और गठरी में बांधकर साथ लाए हैं। बच्चों के लिए यह किसी पिकनिक की तरह नहीं, बल्कि डर और असुरक्षा के बीच गुजरता बचपन है। भूख, गंदगी और मच्छरों के बीच बीमारी का खतरा भी बना हुआ है।

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लालजी टोला के लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आखिर कब तक इसी तरह रहना पड़ेगा। बाढ़ ने घर की चारदीवारी तो छीन ही ली, अब रेल की पटरियों के किनारे गुजरती हर ट्रेन उन्हें रातभर यह एहसास कराती है कि उनका अपना घर उनसे कितनी दूर छूट गया है। ग्रामीण सुरक्षित ठिकाने, भोजन, पेयजल और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

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