'दूध नै मिलै छै केना के बच्चा पालिए हो बाबू...' मुंगेर में राहत शिविरों में दूध के लिए तरस रहे नौनिहाल
बाढ़ प्रभावित मुंगेर में राहत शिविरों में रह रहे बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा है, जिससे माताएं बेहद परेशान हैं।

राहत शिविरों में नहीं मिल रहा दूध। (जागरण)
HighLights
मुंगेर बाढ़ पीड़ितों के बच्चों को शिविरों में दूध नहीं मिल रहा।
माताएं बच्चों के लिए दूध की कमी से अत्यधिक परेशान हैं।
आंगनबाड़ी सेवाएं भी बाढ़ प्रभावित बच्चों तक नहीं पहुँच रहीं।
मनोज कुमार, मुंगेर। बाढ़ का पानी त्रासदी बन कर लोगों के लिए परेशानी का सबब बना है। घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने के बाद शरणार्थी बनकर लोग राहत शिविर के अलावा जहां-तहां उंचे स्थानों पर छोटे-छोटे नौनिहाल बच्चों के साथ रह रहे हैं।
समाहरणालय के सामने स्थित केसी सुरेन्द्र बाबू पार्क मैदान और जिला स्कूल राहत शिविर में शरणार्थी बन कर जीवन व्यतीत कर रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों का जायजा बुधवार को दैनिक जागरण ने लिया।
छोटे-छोटे नौनिहाल बच्चों के साथ शिविर में रह रही महिलाओं ने बताया कि शिविर में बच्चों के लिए दूध का प्रबंध नहीं है। आंगनबाड़ी से मिलने वाला दूध भी उन लोगों को नहीं मिल रहा है।
महिलाओं ने अपनी भाषा में बताया शिविर में बच्चा के दूध नै मिलै छै, दूध नै पिला पर बच्चा कानै छै, कैसे बच्चा पालियै बाबू।
समाहरणालय के सामने मैदान में रह रही शरणार्थी महिला सीताचरण निवासी रिंकू देवी ने बताया कि एक सप्ताह से पति साजन सिंह, मां जगता देवी और दो छोटे बच्चों के साथ शरणार्थी बन कर रह रही है।
पके हुए भोजन का इंतजार
केसी सुरेंद्र बाबू पार्क में सीताचरण के दो दर्जन से ज्यादा परिवार हैं, लेकिन वहां पका हुआ भोजन नहीं पहुंचता है। बबुआ घाट जाकर पका हुआ भोजन लाते हैं, उससे बड़े लोगों का पेट तो भर जाता है।

लेकिन बच्चों को दूध नहीं मिल पाता, जबकि गांव में बच्चे रोज घर में दूध पीते थे, बच्चों को दूध पीने का आदत है। दूध के बिना बच्चे रोते हैं।
जिला स्कूल शिविर में मिर्ची तालाब लाल दरवाजा निवासी बाढ़ पीड़ित पूजा देवी ने बताया कि उन लोगों का घर पानी में डूब गया है। बच्चों के साथ जिला स्कूल में एक सप्ताह से रह रहे हैं। यहां उन लोगों को दो टाइम पका हुआ भोजन मिलता है। बच्चों के लिए दूध शिविर में नहीं मिलता है।
बताया कि पका हुआ भोजन से उन लोगों का पेट तो भर जाता है, लेकिन दूध नहीं मिलने से बच्चे बिलखते हैं। लाल दरवाजा निवासी रानी देवी ने भी बच्चों को दूध नहीं मिलने की बात कही।
आंगनबाड़ी के बारे में बताया कि गांव का आंगनबाड़ी केन्द्र भी पानी में डूब गया है, इसलिए वहां भी बच्चों को दूध नहीं मिल रहा है।

पानी में डूब चुके जगहों पर संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र को राहत शिविर में शिफ्ट करने का निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिया गया है।
बाल विकास परियोजना कार्यालय द्वारा राहत शिविर में आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित करने का दावा भी किया जाता है, लेकिन वास्तविकता यही है कि शरणार्थी महिलाओं व बच्चों को आंगनबाड़ी का लाभ नहीं मिल रहा है।
जिलाधिकारी आदेश देंगे तो बंटेगा दूध
आईसीडीएस डीपीओ रश्मि सिंहा को इस संबंध में जानकारी लेने के लिए फोन किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला।
आईसीडीएस की समन्वयक मुक्ता कुमारी ने बताया कि पोषक क्षेत्र के बच्चों और महिलाओं को आंगनबाड़ी का लाभ देने का प्रावधान है। जिलाधिकारी अगर आदेश करेंगे तो बाढ़ राहत शिविर और शरणार्थियों के बीच दूध का वितरण किया जाएगा।
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