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मुंगेर की ढोल पहाड़ी बनेगी इको टूरिज्म हब, डिप्टी CM सम्राट ने 12.49 करोड़ रुपए की दी मंजूरी; लगेगी शिव प्रतिमा

Published: Wed, 08 Apr 2026 07:44 PM (IST)

मुंगेर की ढोल पहाड़ी को 12.49 करोड़ रुपये की लागत से इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस परियोजना को मंजूरी दी है।

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संवाद सहयोगी, तारापुर (मुंगेर)। राज्य सरकार ने मुंगेर के पर्यटन नक्शे को नई चमक देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने असरगंज स्थित ढोल पहाड़ी को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए 12.49 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना से न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी सृजित होंगे।तारापुर अनुमंडल के असरगंज में स्थित ढोल पहाड़ी को अब आधुनिक सुविधाओं से लैस पर्यटन, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व भी रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह क्रांतिकारियों का गुप्त अड्डा था, जहां से अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाई जाती थी। ढोल बजाकर संदेश देने की परंपरा के कारण ही इसका नाम ढोल पहाड़ी पड़ा।

यहां बैंक्वेट हाल, हाट बाजार, क्राफ्ट शाप्स और वेंडिंग जोन बनाए जाएंगे। पर्यटकों की सुविधा के लिए पब्लिक टायलेट, पार्किंग एरिया, पक्के पाथवे और आकर्षक सुंदरीकरण कार्य किया जाएगा।

साथ ही मेला ग्राउंड, पिकनिक स्पाट, ग्रीन बेल्ट और लैंडस्केपिंग के जरिए प्राकृतिक सुंदरता को संवारा जाएगा। बच्चों के लिए प्ले एरिया, स्पोर्ट्स कोर्ट और पर्यटकों के लिए आब्जर्वेशन डेक भी आकर्षण का केंद्र होंगे।

शिव प्रतिमा भी होगी स्थापित

धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए यहां शिव प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। साथ ही बाबा मौनीनाथ मंदिर और प्राचीन गुफाओं को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होगा। पूरे प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है।

सोलर लाइटिंग, सोलर रूफटाप, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, फायर फाइटिंग और आधुनिक विद्युत व्यवस्था विकसित की जाएगी। पेयजल और सीवरेज सिस्टम को भी दुरुस्त किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक सुविधाओं के अभाव में ढोल पहाड़ी की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था। परियोजना पूरी होने के बाद यहां नियमित हाट-बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। मुंगेर का बिहार योग विद्यालय, भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य और हवेली खड़गपुर झील पहले से ही आकर्षण के केंद्र हैं। अब ढोल पहाड़ी के विकास से मुंगेर विश्व पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा।