विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रेल तकनीक का ग्लोबल हब बनेगा जमालपुर! 160-180 की स्पीड में सुरक्षा की चुनौती से निपटेंगे इरिमी के विशेषज्ञ इंजीनियर

Published: Sun, 18 Oct 2026 04:34 PM (IST)

Jamalpur IRIMEE Training 160-180 KMPH Trains: भारतीय रेल में 160-180 किमी/घंटा की रफ्तार वाली ट्रेनों के लिए जमालपुर स्थित इरिमी ...और पढ़ें

Jamalpur IRIMEE Training 160-180 KMPH Trains: जमालपुर इरिमी में तैयार हो रहे हाईटेक रेल इंजीनियर

Jamalpur IRIMEE Training 160-180 KMPH Trains: जमालपुर इरिमी में तैयार हो रहे हाईटेक रेल इंजीनियर

HighLights

  1. इरिमी में हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए इंजीनियरों का विशेष प्रशिक्षण।

  2. वंदे भारत, एलएचबी कोचों की तकनीकी समझ पर जोर।

  3. जमालपुर बन रहा रेल तकनीक का विशेषज्ञ केंद्र।

संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर)। Jamalpur IRIMEE Training 160-180 KMPH Trains: भारतीय रेल में ट्रेनों की रफ्तार को 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना के बीच पटरियों पर यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा को लेकर तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है।

सेमी हाई-स्पीड परिचालन की तकनीकी चुनौतियों और संरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए मुंगेर के जमालपुर स्थित ऐतिहासिक 'भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान' (इरिमी) में देश भर के रेल इंजीनियरों को विशेष रूप से दक्ष बनाया जा रहा है।

यहां आधुनिक ट्रेनों की संरचना, कोच की स्थिरता और गहन रखरखाव से जुड़े पहलुओं का गहन प्रशिक्षण देकर ऐसे विशेषज्ञ तैयार किए जा रहे हैं, जो भविष्य की तेज रफ्तार रेल व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध रख सकें।

वंदे भारत और एलएचबी कोच की तकनीकी समझ अनिवार्य

भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के वर्तमान दौर में वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों और आधुनिक एलएचबी (LHB) कोचों की भूमिका निरंतर बढ़ती जा रही है। ऐसे में पारंपरिक तकनीक से इतर इन अत्याधुनिक कोचों के इलेक्ट्रॉनिक, मैकेनिकल और न्यूमेटिक प्रणालियों की गहरी समझ रखने वाले दक्ष इंजीनियरों की मांग रेलवे में तेजी से बढ़ी है।

इरिमी में संचालित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। संस्थान के महानिदेशक अनिमेष कुमार सिन्हा और डीन प्रेम प्रकाश की सीधी देखरेख में रेल इंजीनियरों को अत्याधुनिक सिमुलेटर, आधुनिक उपकरणों और सुरक्षित परिचालन की कार्यप्रणाली से रूबरू कराया जा रहा है।

रफ्तार के साथ सुरक्षा-संरक्षा की दोहरी चुनौती

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रेनों की गति को 160 से 180 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाना केवल शक्तिशाली इंजनों तक सीमित नहीं है। अत्यधिक गति में कोच का ट्रैक पर संतुलन (कोच स्टेबिलिटी), तेज मोड़ पर झटकों का अवशोषण, हाइड्रोलिक सस्पेंशन की मजबूती और आपातकालीन स्थिति में तकनीकी प्रणालियों की त्वरित विश्वसनीयता सबसे अहम होती है।

इन्हीं बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए इंजीनियरों को आधुनिक हाइड्रोलिक तकनीक, उन्नत गति प्रबंधन (Speed Management) और सख्त सुरक्षा मानकों के अनुरूप कार्य करने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि परिचालन के दौरान किसी भी सूक्ष्म तकनीकी खामी को पहले ही भांपकर उसका ऑन-साइट समाधान निकाला जा सके, ताकि उच्च गति पर भी 'शून्य दुर्घटना' का लक्ष्य हासिल हो।

रेल तकनीक का विशेषज्ञ केंद्र बनकर उभरा जमालपुर

एशिया के सबसे पुराने रेल कारखानों में शुमार जमालपुर का इरिमी संस्थान अब केवल सामान्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आधुनिक रेल तकनीक और हाई-स्पीड नेटवर्क का राष्ट्रीय विशेषज्ञता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) बनने की दिशा में अग्रसर है।

संस्थान का लक्ष्य भविष्य की बुलेट और सेमी हाई-स्पीड रेल की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। जमालपुर का यह संस्थान भारतीय रेल को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सुदृढ़ और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक अहम रीढ़ साबित हो रहा है।

यह भी पढ़ें- भारतीय रेल: जमालपुर इरिमी से निकले इंजीनियर LHB कोचों का तकनीकी सुरक्षा करेंगे मजबूत